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चलते चलते जरा उड़ना सीखो, उड़ते उड़ते चलना ...

एक वर्ष पहले
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पिछले सप्ताह हमने यह फनी फोटो देकर पाठकों से कैप्शन आमंत्रित किए थे। पेश हैं कुछ चुनिंदा नॉनसेंस कैप्शन:

ये फोटो नॉनसेंस है

इस हफ्ते का नॉनसेंस फोटो- इस तस्वीर को देखकर आपके भी दिमाग में मजेदार कैप्शन आ रहे होंगे। तो भेज दीजिए humour@dbcorp.in पर...

>आज मैं ऊपर, धरती है नीचे। -रोहित शर्मा, धार

>आज रपट जाए तो हमें जरूर उठइयो....। -वेदिका पंचारिया

>फिसलती हुई भारत की अर्थव्यवस्था।
-सुमित मुंदलिया, मकराना

>यस बैंक, ऐसे गिरा औंधे मुंह। -शेखर हर्ष

>चलते चलते उड़ना सीखो।
-यश टेमरे

>घर से निकलते ही....... कुछ दूर चलते ही। - गौरव चौधरी

>यस बैंक से पैसे निकालने जाता हुआ एक ग्राहक।
- लक्ष्मण जाखड़

>इधर चला मैं उधर चला, जाने कहां मैं किधर चला। अरे फिसल गया.... ओ केले के छिलके, ये तूने क्या किया।
- मुकेश परमार

>मोबाइल पर था ध्यान, गिरकर आया ज्ञान!
- विकास साओ

>बड़े धोखे हैं इस राह में...।
- भारती वरलानी, जयपुर

>जॉनी, जिनके पैर हवा में होते हैं, वे चेहरा दिखाने लायक नहीं बचते। - साजिद अली, इंदौर

>नजर हटी, दुर्घटना घटी।
- श्रेया प्रियदर्शी, बोकारो

>क्या करूं मेरे पांव जमीन पर नहीं टिकते?-बीएल शर्मा, तराना

>मैं निकला गड्डी लेके, रास्ते में केले का छिलका आ गया, मैं वहीं गिर गया। - अंचल गुप्ता
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