जिंदगी ऐसा त्योहार है जिसे रोज मना सकते हैं, ये तारीख की मोहताज नहीं है: दीपा

Jaipur News - सिटी रिपोर्टर

Jul 14, 2019, 08:35 AM IST
सिटी रिपोर्टर
आजादी : खिलौनों से कम, बैट और बाइक से ज्यादा लगाव था

दीपा बताती हैं कि बचपन में खिलौनों से कम, बैट और बॉल से ज्यादा खेला है। जैसे-जैसे बड़ी हुई बाइक से लगाव बढ़ता गया। पापा के स्कूटर की चाबी छुपा लेती थी और उनकी गैरमौजूदगी में लेकर निकल जाती थी। पापा ने मुझे काबू में रखने के लिए गर्ल्स स्कूल में डाल दिया, लेकिन वहां भी हर एक्टिविटी में अव्वल रही। आगे चलकर लाइफ में ऐसा इंसान आया जिसने बाइक तो दिलवाई, साथ में ट्यूर भी किया।

सामाजिक बुराई : लगता है मां की बीमारी आ गई बेटी में

दीपा ने कहा, समाज में खासतौर पर महिलाएं ही बिगाड़ पैदा करती हैं। मेरी बड़ी बेटी का एक्सीडेंट हुआ और वह पैरालाइज हो गई, लेकिन समाज ने उसके लिए भी ऐसी बातें बनाईं जिनको याद करके आज भी दुख होता है। एक्सीडेंट और मेरी बीमारी का क्या वास्ता है, लेकिन समाज ने उसे भी नहीं छोड़ा। कई महिलाओं से तो मैंने खुद ने सुना है कि इसे तो मां की बीमारी लग गई है। इस लड़ाई के बीच मेरी दूसरी बेटी ने दुनिया में कदम रखा, जो आज भी मुझसे कहती है कि दुनिया को दिखाने के लिए ही मुझे जन्म दिया है क्या.?

बॉडी बैलेंस : खाना तो दूर पानी भी नाप-तोल के पीना पड़ता है

दीपा बताती हैं कि मेरा खुद का शरीर पर कंट्रोल नहीं है। ऐसे में खाना और फ्रूट्स तो दूर पानी भी नाप-तोल के पीना पड़ता है। अगर थोड़ा भी ज्यादा हो जाता है तो बॉडी आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है। लेकिन दुनिया की कोई भी मेडिकल प्रॉब्लम मुझे खूबसूरत बनने से रोक नहीं सकती। जिंदगी एक ऐसा त्योहार है जिसे रोज मना सकते है, ये कोई तारीख की मोहताज नहीं है।

ब्यूटी कॉन्टेस्ट : फिर भी जीता खिताब

दीपा ने अपनी ब्यूटी और टैलेंट के दम पर ब्यूटी कॉन्टेस्ट का खिताब अपने नाम किया है। लेकिन जब वे इस कॉन्टेस्ट का हिस्सा बनी तो लोगों ने कहा, इसकी तो चाल में भी लचक है ये क्या करेंगी इसमें। लेकिन जिस वॉक में मेरे मार्क्स कटे, उससे ज्यादा मार्क्स मैने दूसरी एक्टिविटीज में हासिल किए और ब्यूटी कॉन्टेस्ट का खिताब जीता।

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