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लंबे समय तक कब्ज रहने से भी रैक्टम कैंसर का खतरा
कैंसर होने पर मोशन नहीं सिर्फ ब्लीडिंग होती है, इससे ब्लड लॉस होने पर कमजोरी आने की आशंका बढ़ जाती है
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ब्लीडिंग पैटर्न से जानें अन्य बीमारियां
ब्लीडिंग के साथ अगर डायरिया हो रहा है। यह अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोंस बीमारी हो सकती है। यह छोटी व बड़ी आंत की प्रॉब्लम होती है। बड़ी आंत में अल्सर होने के कारण कोलाइटिस होता है। इसमें दर्द के साथ ब्लीडिंग होती है। फिशर में ड्रॉप-ड्रॉप ब्लीडिंग होती है। यह मोशन के बाद होती है। पाइल्स में मोशन शुरू होने के बाद पिचकारी की तरह ब्लीडिंग होती है।
ट्रीटमेंट: फिशर और पाइल्स का मुख्य कारण कब्ज है। कब्ज ठीक होने पर यह स्वत: ही ठीक होती है। या फिर इसे सर्जरी कर सकते हैं। ग्रेड वन और ग्रेड टू पाइल्स डाइट के जरिए ही ठीक हो जाते हैं। 90 परसेंट दवाइयों से ठीक हो जाता है। ग्रेड थ्री और फोर में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। क्रोंस डिजीज में मेडिकल और सर्जिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। लंबे समय तक बीमारी रहने पर स्टीरॉयड और सर्जरी की जाती है।
रैक्टम से होने वाली ब्लीडिंग को अनदेखा नहीं करें। यह ब्लीडिंग साधारण से लेकर एडवांस स्टेज तक की डिजीज का संकेत देती है। कैंसर के अलावा फिशर, पाइल्स, अल्सर, क्रॉनिक अल्सरेटिव कोलाइटिस में ब्लीडिंग होती है। ऐसे में, अक्सर इसे पाइल्स की ब्लीडिंग समझते हुए लोग इंजेक्शन लगवाते हैं। कुछ समय के लिए इंजेक्शन से ब्लीडिंग ठीक हो जाती है। लोग यह मान लेते हैं, पाइल्स ठीक हो गए। जबकि अंदर कैंसर डवलप होता रहता है। ब्लीडिंग बंद होने पर कैंसर की जांच नहीं हो पाती हैं। 70 परसेंट लोग ऐसा ही करते हैं। इसलिए बिना डायग्नोस करवाएं इंजेक्शन नहीं लगवाएं। इसके अलावा इंजेक्शन से पस बनकर घाव बढ़ सकता है।
मोशन नहीं ब्लीडिंग आना कैंसर का संकेत : लंबे समय तक कब्ज नहीं रहने दें। क्राॅनिक कब्ज बनी रहने से रैक्टम पर छाले या अल्सर बन जाते हैं। इनका जल्दी इलाज शुरू नहीं होने पर ये कैंसर में तब्दील हो सकते हैं। इसलिए कब्ज से ग्रसित लोगों में रैक्टम के जरिए ब्लीडिंग हो रही है। इसे नजरअंदाज नहीं करें। यह ब्लीडिंग कैंसर के कारण भी हो सकती है। एडवांस स्टेज पर ट्यूमर होने के कारण ब्लीडिंग शुरू होती है। कई बार यह मोशन के साथ होती है। कुछ केसों में मोशन नहीं होकर सिर्फ ब्लीडिंग होती है। इससे ज्यादा मात्रा में ब्लड लॉस हो सकता है। अक्सर लोग इसे साधारण ब्लीडिंग मानते हुए अवॉइड करते रहते हैं। अन्य पैथी का इलाज लेते रहते हैं। इससे कुछ समय के लिए ब्लीडिंग कंट्रोल हो जाती है, लेकिन कैंसर का डायग्नोस नहीं हो पाता है। जब तक कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। एडवांस स्टेज में सर्जरी के रिजल्ट अच्छे नहीं आ पाते हैं। सर्जरी ही इसका इलाज है। कैनाल कैंसर में कीमो व रेडियोथेरेपी ही इलाज है। यहां सर्जरी संभव नहीं है। ब्लीडिंग आने पर देरी करने के बजाय डायग्नोस करवाकर इलाज शुरू करवाएं।