मंटो कहते : 70 साल में नहीं सीखा, फिर पार्टीशन चाहते हो?

Jaipur News - सेशन : मंटो एंड आय वेन्यू : फ्रंट लॉन स्पीकर्स : नंदिता और कावेरी बम्ज़ाई बकुल महेश . जयपुर मुझे विश्वास है कि...

Jan 24, 2020, 08:40 AM IST
Jaipur News - rajasthan news manto says have not learned in 70 years then you want a partition
सेशन : मंटो एंड आय

वेन्यू : फ्रंट लॉन

स्पीकर्स : नंदिता और कावेरी बम्ज़ाई

बकुल महेश . जयपुर

मुझे विश्वास है कि हम सभी में मंटोइयत कहीं छिपी है। मंटोइयत दर्शाता है मुक्त आत्मा, निडरता और बेबाकी। हमारे बीच भी कई मंटो हैं, कइयों को मार दिया, कई जेल में हैं और कई प्रोटेस्ट पर बैठे हैं। लोग पहले से ज्यादा आवाज़ उठाने लगे हैं कि हमें एक बार फिर पार्टीशन नहीं चाहिए। अगर अभी मंटो होते तो यही कहते कि 70 साल में कुछ नहीं सीखा कि फिर पार्टीशन चाहते हो? तुम फिर उस जमाने में जाना चाहते हो, जहां धर्म को विभाजन का साधन बनाया जाता था। यह कहना था ऑथर, डायरेक्टर व एक्ट्रेस नंदिता दास का। इस मौके पर नंदिता की किताब "मंटो एंड आई' लॉन्च हुई, जिसके लिए सिंगर शुभा मुद्गल उपस्थित रहीं। किताब में मंटो फिल्म की मेकिंग व उनके प्रति नंदिता के लगाव पर लिखा गया है। ऑथर ने शूटिंग के पहले दिन मंटो को लिखे खत भी इसमें शामिल किए। सेशन में जर्नलिस्ट कावेरी बम्ज़ाई से चर्चा के दौरान नंदिता ने कहा कि एनआरसी व सीएए के मसले में लोगों का एक होकर आवाज उठाना, लोगों को एक दूसरे के करीब ही लाएगा। नाकि हम एक दूसरे से दूर होंगे।

5-6 लोग देश की पसंद-नापसंद तय कर देते हैं

सेंसरशिप पर ऑथर ने कहा कि फिराक व मंटो को बनाते समय मैं सेंसरशिप के लोगों से मिलने जाती थी। पूरे देश को क्या देखना चाहिए, कुछ 5-6 लोग इस बात का निर्णय लेते हैं। जो अपने को कल्चर का संरक्षक मानते हैं। किसे क्या पसंद आएगा, चंद लोगों की टीम निर्धारित करती है। आर्ट सब्जेक्टिव है। सबसे खतरनाक तब होता है जब आप खुद को सेंसर करने लग जाएं। वो भी इसलिए, क्योंकि चारों ओर डर का माहौल है कि हम कुछ गलत न बोल दें। मुझे याद है 2016 में मुझे इतना ट्रोल किया गया, इतना कि मेरे 5 पांच साल के बच्चे की तस्वीरें पोस्ट कर, उनपर गंदे कमेंट्स सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने लगे थे। इन सब चीजाें ने मुझे भी डराया। लेकिन आप को डरने की जरूरत नहीं है, अपने काम पर ध्यान दें। हिम्मत अपने आप आ जाएगी।

मंटो होते तो उन्हें भी आइडेंटिटी प्रूव करनी पड़ती

मंटो की कहानी ‘टोबा टेक सिंह’ को सुनाते हुए नंदिता ने कहा कि मंटो पार्टीशन के दर्द को दर्शाना चाहते थे। जहां पाकिस्तान व भारत के दिमागी मरीजों को एक दूसरे के देश भेजा जाएगा। उसमें एक को बुजुर्ग सीख के बारे में बताया गया जो अपने गांव टोबा टेक सिंह की तलाश में है। हिंदुस्तान पहुंचते ही उसे पता पड़ता है कि उसका गांव तो पाकिस्तान में ही रह गया। ये असल में हुआ भी था कि दोस्त बंट गए, परिवार अलग हो गए। कुछ मायनों में ये सवाल आज दोराबा उठाया जा सकता है कि हम असल में कहां से संबंध रखते हैं। जो मंटो ने इतने साल अपनी कहानी के जरिए पूछा। अभी अगर वो होते तो उन्हें भी अपनी आइडेंटिटी शुरू से प्रूव करनी पड़ती।

कबीर पंडित-मुल्ला दोनों से घृणा करते थे, इसलिए लिखा : मेहरोत्रा

सेशन : महाकवि कन्हैयालाल सेठिया अवाॅर्ड।

वेन्यू : चारबाग

स्पीकर्स : अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा, जयप्रकाश सेठिया, प्रसून जोशी, सचिन पायलट, नमिता गोखले, निरुपमा दत्त, एजे थॉमस, संजय राय

जेएलएफ में गुरुवार को महाकवि कन्हैयालाल सेठिया अवॉर्ड प्रदान किया गया। यह अवॉर्ड कवि अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा को मिला। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रसून जोशी ने मेहरोत्रा को यह सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पायलट ने जेएलएफ की तारीफ की और कहा कि यहां विभिन्न विचारधाराओं के लोग आते हैं। यहां विचारों का आदान प्रदान होता है। किताबें लॉन्च होती हैं। सभी बराबर रहते हैं कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। यह आयोजन जयपुर और पूरे राजस्थान के लिए सम्मान की बात है। यह एकमात्र आयोजन है, जिसको कवर करने के लिए पत्रकारों में होड़ रहती है और वे इसको कवर करना सम्मान की बात समझते हैं। महाकवि सेठिया की कविताओं को लेकर पायलट ने कहा कि ये सम्मान उनकी कविताओं का सम्मान है। उनकी कविताएं राजस्थान और देश के इतिहास का अमिट पन्ना है। मेहरोत्रा ने कहा कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे कोई सम्मान मिलेगा। चालीस साल बाद पहली बार सम्मानित हो रहा हूं। मल्होत्रा ने कहा कि कबीर पर लिखने के लिए केवल एक वजह से प्रेरित हुआ। वो मुल्ला और पंडित से बराबर घृणा करते थे।

बाल तस्करी के प्रति विजिटर्स को किया जा रहा है जागरूक

सिटी रिपोर्टर | मिसिंग लिंक ट्रस्ट की ओर से जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2020 में बाल तस्करी के बारे में जागरूक किया जा रहा है। संस्था की ओर से प्रश्नावली, खेल और लघु फिल्माें के माध्यम से विजिटर्स को बाल तस्करी को रोकने के लिए अवेयर किया जा रहा है। संस्था की फाउंडर लीना केजरीवाल ने बताया कि आज समाज में जागरूकता के स्तर को बढ़ाने की आवश्यकता है, खासतौर पर 10-16 आयु के वर्ग को इस गंभीर सब्जेक्ट से अवगत कराने की ज्यादा जरूरत है। अगर हम इस मुद्दे को मुख्यधारा में लाते हैं तो बाल तस्करी को समाप्त किया जा सकता है।

रजिस्ट्रेशन महंगे हाेने से जेएलएफ में भीड़ हुई कम

सिटी रिपोर्टर | इस बार अाॅन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन फीस महंगी हाेने से जेएलएफ के पहले दिन भीड़ काफी कम नजर अाई। पिछले साल जहां वीकेंड पर 500 अाैर अन्य दिनाें में 300 रुपए फीस थी। वह इस बार 800 अाैर 500 कर दी गई है। इसकी वजह से काफी कम संख्या में लाेग पहुंचे। जेएलएफ के दाैरान जेएलएन मार्ग पर रामनिवास बाग के पीछे वाले गेट के पास भी पार्किंग बनाई गई है, जिससे लाेगाें काे करीब 1 किमी पैदल चलकर कार्यक्रम में पहुंचना पड़ रहा है।

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