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सोमवारी अष्टमी के दिन होगी मां शीतला की पूजा, ठंडे पकवानों का लगाया जाएगा भोग

एक वर्ष पहले
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राजधानी का सबसे बड़ा शीतला माता का मेला इस बार सोमवार को भरेगा। इस बार सप्तमी पर रविवार आ रहा है, जो क्रुर वार माना जाता है। इसलिए इस दिन शीतला माता की पूजा करने का शास्त्रीय विधान नहीं है। लोकमान्यता के अनुसार क्रुर वार को शीतला माता की पूजा नहीं हो सकती। सोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार को ही शीतला माता की पूजा की जा सकती है। क्योंकि यह वार सौम्य वार माने जाते है। यह जानकारी देते हुए बंशीधर पंचांग के निर्माता दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि रविवार को लोग बासोड़ा बनाएं और सोमवार को इसका भोग माताजी के लगाएं।

रविवार को हिंदु महिलाएं घर पर रांधा पुआ बनाएगी। इसके तहत भीगे हुए मूंग, मोठ, चने, पुआ-पकौड़ी, दही व राबड़ी सहित विभिन्न पकवान बनाएंगे। रात को दही जमा कर मीठे चावल, कड़ी, राबड़ी, पकौड़ी, बेसन की चक्की, पूड़ी, विशेष सब्जी बनाई जाएगी। साेमवार को ठंडे पकवानों का भोग लगाया जाएगा। शीतलाष्टमी को घरों में चूल्हे नहीं जलेंगे। चाय भी शीतला माता की पूजा के बाद ही मिलेगी। इस दिन घर की रसोई में पूरी तरह साफ-सफाई की जाएगी।

लोकमान्यता के अनुसार शीतलाष्टमी को ठंडा भोजन खाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक तथ्य है। माता शीतला को शीतल ठंडे व्यंजन और जल पसंद है। इससे मां शीतला प्रसन्न होती है और श्रद्धालुओं को निरोग होने का वरदान देती है। शीतलाष्टमी से गर्मी का दौर शुरू हो जाता है। शीतला अष्टमी के दिन विशेष खगोलीय स्थिति में ठंडे व्यंजन खाने से पूरे मौसम में गर्मी जनित बीमारियां नहीं होती। शीतलाष्टमी को गणगौर पूजन करने वाली महिलाएं कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर गणगौर बनाकर पूजन करेंगी।

शीतलाष्टमी कल-आज रांधा पुआ, निरोगी होने का वरदान देती है मां
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