गर्मी से ही नहीं, एंग्जाइटी में भी ज्यादा निकलता है पसीना

Jaipur News - हैल्थ रिपोर्टर जयपुर गर्मी में पसीने आना सामान्य है। अगर ज्यादा पसीने आ रहे हैं तो यह किसी बीमारी के...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:21 AM IST
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हैल्थ रिपोर्टर
गर्मी में पसीने आना सामान्य है। अगर ज्यादा पसीने आ रहे हैं तो यह किसी बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। या फिर पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित होने पर सामान्य से ज्यादा पसीने आते है। स्वेटिंग से शरीर का एक हिस्सा या पूरा शरीर प्रभावित होता है। हांलाकि, इससे शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है, लेकिन यह असुविधाजनक और साइकोलॉजिकल ट्रोमा भी पहुंचा सकती है। सामान्यत: एंग्जाइटी,ओबेसिटी, बीएमआर, मीनोपॉज में हॉर्मोंस असंतुलित की वजह से ज्यादा स्वेटिंग होती है। फिजियाेलॉजिकल स्वेटिंग नुकसानदायक नहीं है। लो ब्लड प्रेशर लो और ज्यादा ब्लीडिंग में भी ज्यादा स्वेटिंग हो सकती है। हार्ट और इंफेक्शन से ग्रसित पेशेंट्स में पसीना ज्यादा आता है। वहीं, एंग्जाइटी के कारण पसीने की ग्रंथियां हाइपर एक्टिव हो जाती हैं। इससे तलवे व हथेलियों में पसीना ज्यादा आने से इनमें गीलापन महसूस होता रहता है। पसीने के साथ शरीर से मिनरल्स,पौटेशियम और साल्ट बाहर निकलता है। जिसकी वजह से थकान महसूस होती है।

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कैसे पहचाने ज्यादा पसीना आ रहा है

हथेलियों और तलवों में गीलापन महसूस होना, जल्दी-जल्दी पसीना आना, कपडों में सोखने के बाद इसका दिखाई देना।

नुकसान: फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन, कपडों पर दाग आना,खुद पर ज्यादा फोकस करना, सोश्यल एक्टीविटीज की वजह से दूर रहने पर डिप्रेशन होना। हाथ, पैर और आर्म पिट सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

रिस्क् फैक्टर: स्पाइन कॉर्ड इंजरी, अल्कोहल, एंग्जाइटी, डायबिटीज, गाउट, हार्ट डिजीज, हाइपरथाॅयरोडिज्म, ओबेसिटी, पार्किंंसन, शुगर, प्रेग्नेंसी, रेस्पि्रटेरी फेलियर, लो बीपी ज्यादा ब्लीडिंग, एचआईवी, मलेरिया, टीबी जैसे इंफेक्शन आदि। जो लोग एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयां ले रहे हैं। उनमें यह बीमारी ज्यादा होने की संभावना है। ज्यादा पसीना आना एक जेनेटिक प्रॉब्लम भी है। पेशेंट की मेंटल और इमोशनल स्थिति पर यह निर्भर करता है। एंग्जाइटी, नर्वसनैस, इमोशनल स्ट्रेस में ऐसा होता है। स्टडीज में पाया गया कि यदि पेरेंट्स इस बीमारी से ग्रसित है, उनके बच्चों और सिबलिंग में इसके ट्रांसफर होने का खतरा है। सप्ताह में एक बार अतिरिक्त स्वीटिंग होने से सोश्यल जिंदगी प्रभावित होती है।

-डॉ.आरएस खेदड़, फिजिशियन, जयपुर

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