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अब कांग्रेस पढ़ाएगी वीर और देशभक्त नहीं थे सावरकर, जेल से बचने को अंग्रेजों से दया मांगी थी

2 वर्ष पहले
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विनोद मित्तल | जयपुर

पिछली भाजपा सरकार के कई फैसले पलट चुकी कांग्रेस सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम में सावरकर की जीवनी वाले हिस्से में बदलाव किया है। हिंदुत्व के अनुयायी दामोदर सावरकर को तीन साल पहले भाजपा सरकार में तैयार सिलेबस में वीर, महान देशभक्त व क्रांतिकारी बताया था। अब कांग्रेस शासन में नए सिरे से तैयार पाठ्यक्रम में उन्हें वीर नहीं बताकर जेल की यातनाओं से परेशान होकर ब्रिटिश सरकार से दया मांगने वाला बताया है। कई और नए तथ्य भी जोड़े गए हैं।

उधर, भाजपा ने इसे वीर सावरकर की वीरता का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि सिलेबस की समीक्षा के लिए गठित कमेटी के प्रस्तावों के अनुसार सिलेबस तैयार हुआ है। शेष | पेज 8



इसमें राजनीति नहीं की गई है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के आते ही स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा का काम शुरू हुआ था। इसके लिए दो कमेटियां बनाई गई थी। माध्यमिक शिक्षा के सिलेबस की समीक्षा के लिए गठित कमेटी ने 10वीं कक्षा के पाठ-3 अंग्रेजी साम्राज्य का प्रतिकार एवं संघर्ष में देश के कई महापुरुषों की जीवनी शामिल है। इसमें वीर सावरकर से जुड़े हिस्से में काफी बदलाव किया गया है।







भाजपा ने वीर पढ़ाया था
वीर सावरकर की जीवनी की शुरुआती कुछ लाइनों में लिखा था कि वीर सावरकर महान क्रांतिकारी, महान देशभक्त और महान संगठनवादी थे। उन्होंने आजीवन देश की स्वतंत्रता के लिए तप और त्याग किया। उसकी प्रशंसा शब्दों में नहीं की जा सकती। सावरकर को जनता ने वीर की उपाधि से विभूषित किया। अर्थात वे वीर सावरकर कहलाए। भाजपा शासन में पढ़ाया गया था कि सावरकर ने अभिनव भारत की स्थापना 1904 में की थी।

अब कांग्रेस यह पढ़ाएगी
सावरकर की जीवनी में नए तथ्य जाेड़े गए हैं। लिखा है कि जेल के कष्टों से परेशान होकर सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के पास चार बार दया याचिकाएं भेजी थी। इसमें उन्होंने सरकार के कहे अनुसार काम करने और खुद को पुर्तगाल का पुत्र बताया था। ब्रिटिश सरकार ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए सावरकर को 1921 में सेलुलर जेल से रिहा कर दिया था। और र|ागिरी जेल में रखा था। यहां से छूटने के बाद सावरकर हिंदु महासभा के सदस्य बन गए और भारत को एक हिंदू राष्ट्र स्थापित करने की मुहिम चलाते रहे। दूसरे विश्वयुद्ध में सावरकर ने ब्रिटिश सरकार का सहयोग किया। वर्ष 1942 में चले भारत छोड़ो आंदोलन का सावरकर ने विरोध किया था। महात्मा गांधी की हत्या के बाद उन पर गोडसे का सहयोग करने का आरोप लगाकर मुकदमा चला। हालांकि बाद में वे इससे बरी हो गए। सावरकर ने अभिनव भारत की स्थापना 1906 में की थी।



इनका कहना है...

यह वीर सावरकर की वीरता का अपमान : पूर्व शिक्षा मंत्री

पूर्व शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि वीर सावरकर हिंदुत्व से जुड़े रहे हैं। कांग्रेस हमेशा हिंदुत्व से घृणा करती है। इसलिए यह वीर सावरकर का कद छोटा करने की कोशिश है। क्रांतिकारियों को सिलेबस में इसलिए शामिल किया जाता है कि बच्चे उनसे प्रेरणा ले सके। लेकिन तथ्यों को तोड़ मरोड़कर इस प्रकार उनका अपमान ठीक नहीं है।

समिति ने तैयार किया है सिलेबस, इसमें कोई राजनीति नहीं की : शिक्षा राज्यमंत्री

शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि सिलेबस की समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। उसी के प्रस्तावों के अनुसार सिलेबस तैयार हुआ है। इसमें किसी प्रकार की कोई राजनीति नहीं की गई है। फिर भी अगर सिलेबस को लेकर कोई मामला सामने आएगा तो उसको दिखावा लिया जाएगा।

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