- Hindi News
- National
- Jaipur News Rajasthan News Obc Women Who Won From General Ward Can Also Become Mayors Bjp In Greater Congress Strong In Heritage
सामान्य वार्ड से जीती ओबीसी महिला भी मेयर बनसकती है, ग्रेटर में भाजपा, हेरिटेज में कांग्रेस मजबूत
कोरोना के खौफ के बीच 5 अप्रैल को चुनी जाएगी शहर की सरकार, राजनीतिक दलों के गुणा-भाग के बीच भास्कर दे रहा आपसे जुड़े 10 सबसे जरूरी सवालों के जवाब
परिसीमन से फायदा किसे : हर बार भाजपा का वार्ड बना, पर दो निगम से फायदा कांग्रेस को
 जयपुर में दो नगर निगम बनने और परिसीमन करने का कांग्रेस व भाजपा में से किसे अधिक फायदा नजर आ रहा है?
A. इतिहास देंखे तो परिसीमन के बावजूद हर बार भाजपा का ही बोर्ड बना है। वर्ष 2009 में परिसीमन के बाद 77 वार्ड हुए, जिसमें भाजपा को 46 मिले थे। वर्ष 2014 में 91 हुए तब भी भाजपा को 64 वार्ड मिले थे। एक निगम होता तो भाजपा काे लाभ होने की संभावना थी। निगम के दो टुकड़े होने से सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। दो में से एक निगम पर कांग्रेस का कब्जा हो सकता है।
दुिनया में कोरोना बनी महामारी, जयपुर में नगर निगम चुनाव की मारामारी
दूसरे वार्ड से भी लड़ सकेंगे चुनाव
 कोई व्यक्ति दूसरे वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है?
A. हां, एक व्यक्ति दूसरे वार्ड से भी चुनाव लड़ सकता है। उसका नाम जयपुर नगर निगम क्षेत्र की मतदाता सूची में होना चाहिए।
 निगम चुनाव कौन लड़ने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
A. चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्ति 21 साल से अधिक का हो। निगम क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम हो। कोई ऐसा आपराधिक मामला दर्ज न हो जिसमें 5 साल या इससे अधिक की सजा का प्रावधान हो। नवंबर 1995 के बाद दो से अधिक संतान न हों। नगर निगम से नो ड्यूज भी लेना होगा।
 पिछले चुनाव और इस चुनाव की तिथियों में काफी अंतर है। इससे चुनाव प्रक्रिया और मतदान पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A. इस बार नामांकन से उपमहापौर के चुनाव तक हर चीज में अधिक समय है। पिछली बार अधिसूचना से उपमहापौर के चुनाव तक 20 दिन का समय था। इस बार 19 मार्च को अधिसूचना जारी होगी। 5 अप्रैल को वोटिंग, 7 को मतगणना, 16 को मेयर व 17 को उपमहापौर का चुनाव होगा। इस बार मतगणना के बाद मेयर के लिए 9 व उपमहापौर के लिए 10 दिन का समय है। इससे पार्षदों की बाड़ेबंदी व खरीद-फरोख्त की संभावना रहेगी।
नगर निगम
चुनाव 2020
कोरोना महामारी घोषित हो चुकी है। ऐसे में निगम चुनावों पर काेराेना के फैलने के डर है। अन्य राज्याें में स्कूलाें, सिनेमाघराें, समूहों में लाेगाें के एकत्र होने पर रोक है, लेकिन जयपुर, जोधपुर व काेटा के 6 नगर निगमों के चुनावों, रैलियाें को लेकर कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
 दोनों निगमों के पार्षदों के बैठने की क्या व्यवस्था रहेगी।
A. ग्रेटर निगम के अधिकारी और पार्षद निगम के लालकोठी स्थित पुराने निगम मुख्यालय में ही बैठेंगे। जबकि हेरिटेज नगर निगम के अधिकारी और पार्षद पुराने पुलिस मुख्यालय में तैयार हो रहे निगम के नए भवन में बैठेंगे।
 250 वार्ड होने से सरकार व शहर के विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा, क्या चुनौतियां आएंगी?
A. पहले 25 से 30 हजार की आबादी पर वार्ड था। अब 10 से 12 हजार की आबादी पर है। एरिया छोटा गया है। पार्षद अपने वार्ड पर फोकस कर सकेंगे। विकास कार्य होंगे। लेकिन दो निगम के हिसाब से कर्मचारियों की उपलब्धता व पर्याप्त संसाधन जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होगा।
 हैरिटेज और ग्रेटर नगर निगमों में कौन सी पार्टी के मेयर बनने की संभावना है?
A. राजनीति में वैसे तो कुछ भी संभव है, लेकिन विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से वर्तमान में हेरिटेज के 96% भाग पर कांग्रेस और 4% भाग पर भाजपा का कब्जा है। इसी तरह ग्रेटर के 72% हिस्से पर भाजपा व 28% हिस्से पर कांग्रेस का कब्जा है। इसलिए हेरिटेज में कांग्रेस और ग्रेटर में भाजपा का महापौर बनने की संभावना अधिक है।
 इस बार जयपुर में मेयर की सीट किस केटेगरी के लिए आरक्षित है?
A. दोनों निगमों में मेयर की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है।
 क्या ओबीसी, सामान्य या सामान्य महिला सीट से जीती हुई ओबीसी महिला
भी महापौर बन सकेगी?
A. निगम के पूर्व निदेशक (विधि) अशोक सिंह का कहना है- ओबीसी, ओबीसी महिला, सामान्य या सामान्य महिला सीट से जीतने वाली ओबीसी वर्ग की महिला मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर सकती है।
 हेरिटेज व ग्रेटर में दोनों ही पार्टियों की ओर से मेयर के प्रमुख दावेदार कौन होंगे।
A. ग्रेटर और हेरिटेज नगर निगम के महापौर पद इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हैं। इस पद के लिए अभी किसी दावेदार का नाम सामने नहीं आया है। ....क्योंकि सबसे पहला काम टिकट लेना है। दोनों ही पार्टियों में अंदरखाने मंथन शुरू तो गया है, लेकिन पार्टियां पत्ते नहीं खोल रही है। टिकट वितरण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मेयर पद के लिए कौन दावेदार रहेगा।
जयपुर | शहर की सरकार के चुनाव की तारीख का एेलान हो चुका है। जयपुरवासी 5 अप्रैल को अपनी सरकार चुनेंगे। निगम के वार्डों की संख्या 91 से बढकर 250 होने से इस बार निगम चुनाव काफी रोचक हो गया है। इसलिए इस बार रिकॉर्ड संख्या में नामांकन दाखिल होने की संभावना है। विधायक व दोनों ही पार्टियों के पदाधिकारियों के पास दावेदार भी पहुंचने लगे हैं। शहर की सियासत को लेकर अब आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे। एक्सपर्ट के बात कर भास्कर बता रहे आपसे जुड़े सवालों के जवाब।