संगठित क्षेत्र में प्राइवेट हॉस्टल बनने का रास्ता खुला, जयपुर के डवलपर्स का फोकस बढ़ा

Jaipur News - असंगठित क्षेत्र में पनप रहे हॉस्टल बिजनेस में अब बड़ी कंपनियों की भी एंट्री हो गई। ओयो हॉस्टल एंड होम्स व वी वर्क...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:20 AM IST
Jaipur News - rajasthan news opportunity to become a private hostel in the organized sector jaipur39s developers increase the focus
असंगठित क्षेत्र में पनप रहे हॉस्टल बिजनेस में अब बड़ी कंपनियों की भी एंट्री हो गई। ओयो हॉस्टल एंड होम्स व वी वर्क जैसी विदेशी कंपनियों ने जयपुर की रियल एस्टेट फर्मों के साथ साझेदारी में संगठित क्षेत्र में हॉस्टल शुरू करने की तैयारी कर ली है। अगले छह साल में प्राइवेट हॉस्टलों में छात्रों को जिम, एक्टिविटी एरिया और इंडोर गेम्स जैसी सुविधाएं मिलने लगे तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। ग्लोबल प्रॉपर्टी कंसलटेंसी फर्म नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट की हाल ही जारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 तक जयपुर में अनुमानित 1.20 लाख छात्रों के लिए रहने की स्पेस की जरूरत होगी। माना जा रहा है कि छह साल में संगठित क्षेत्र में प्राइवेट हॉस्टल बनाने के लिए 7,000 करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में देश में जयपुर एजुकेशन क्लस्टर के तौर पर उभरा है। जयपुर के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले 85 फीसदी छात्र बाहर के है। जयपुर में बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की अनुमानित संख्या 84,386 है। जबकि 15 फीसदी छात्रों को ऑन कैंपस रहने की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में बाहर से आए छात्रों के लिए 71,640 कमरों की जरूरत है। यह वह आंकड़ा साल 2025 तक आठ फीसदी की दर से बढ़कर 1.20 लाख तक पहुंचने की संभावना है। प्राइवेट हॉस्टल में रहने वाले छात्र अभी रहने व खाने-पीने की सुविधा के लिए औसतन 5,000 रुपए खर्च कर रहे हैं। लेकिन छात्र कम लागत में बेहतर सुविधा चाहते हैं।

प्राइवेट हॉस्टल में सुविधाओं की कमी

रियल एस्टेट फर्म विश एम्पायर के निदेशक विनय जोशी का कहना है चुनिंदा डवलपर्स का ही फोकस हॉस्टल बिजनेस पर है। अभी जमीन मालिक खुद ही 25-30 कमरों की बिल्डिंग मंे हॉस्टल चला रहे है। लेकिन यहां मनमाफिक सुविधा नहीं मिलती। टोडार के महासचिव नगेंद्र चौधरी मानते हैं कि लोकल बिल्डरों के लिए बिजनेस ज्यादा आकर्षक नहीं है, क्योंकि प्राइवेट हॉस्टल में निवेश पर सात-आठ फीसदी ही रिटर्न है। जबकि बिल्डर 12 फीसदी ब्याज पर पैसे जुटाते हैं। आेयो व वी वर्क जैसी कंपनियों के लिए यह आकर्षक है। विदेश में 4 फीसदी ब्याज पर पैसा मिल जाता है। ऐसे में उनके लिए सात-आठ फीसदी रिटर्न काफी होता है।

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