पवन कुमार | नई दिल्ली/जयपुर

Jaipur News - निर्भया केस की सुनवाई के बीच जज का शॉर्ट ब्रेक... और सुनाया ये फैसला; तीन महीने की बच्ची मां को सौंपी, कहा: मां-बाप के...

Jan 16, 2020, 08:35 AM IST
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निर्भया केस की सुनवाई के बीच जज का शॉर्ट ब्रेक... और सुनाया ये फैसला; तीन महीने की बच्ची मां को सौंपी, कहा: मां-बाप के झगड़े में मासूम को न पीसें


पवन कुमार | नई दिल्ली/जयपुर

निर्भया केस...दुनियाभर की निगाहें इस पर गड़ी हैं। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इसी मामले की सुनवाई चल रही थी। तभी एक व्यक्ति अपनी महज तीन महीने की बेटी को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा। जब कोर्ट को इस नवजात बच्ची और पिता के आने के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने निर्भया केस की सुनवाई बीच में ही रोकते हुए कहा कि वे एक शॉर्ट ब्रेक लेंगे और पहले इस मामले को सुनेंगे। जस्टिस मनमोहन ने युवती व उसके पति को बच्ची के साथ अपने चैंबर में आने को कहा। कोर्ट ने दोनों ही पक्षों के वकीलों को चैंबर आने से मना कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने बच्ची को उसकी मां के साथ भेज दिया और दोनों जजोंं ने फिर निर्भया मामले में दोषी मुकेश की याचिका पर सुनवाई शुरू की।

दरअसल, पति-प|ी के झगड़े के चलते जयपुर में एक महिला ससुराल से मायके (दिल्ली) चली गई। मगर उसकी 3 महीने की दूध पीती बच्ची कथित तौर पर उससे अलग कर दी गई। बेटी के प्रति एक मां की ममता महिला को हाईकोर्ट तक ले आई। हाईकोर्ट में महिला ने बच्ची को वापस पाने के लिए हैबियस कार्पस याचिका दायर की थी।

यूं समझें मामला...एक साल पहले ही हुई शादी, होते थे झगड़े, प|ी का आरोप- पति ने पीटकर घर से निकाला, बच्ची छीनी

दिल्ली निवासी एक युवती ने वकील मलय के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में 11 जनवरी को एक हैबियस कार्पस याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसकी शादी एक साल पहले जयपुर के एक व्यवसायी से हुई थी। इस शादी से उसकी तीन माह की एक बच्ची है। शादी के बाद से ही उसका पति अक्सर उससे झगड़ा करता रहता है। 1 जनवरी को उसके पति ने उसकी पिटाई कर उसे घर से निकाल दिया। कहा-जज साहब मेरे पति ने मेरी 3 माह की दुधमुही बच्ची मुझसे छीन ली है, मुझे मेरे दिल का टुकड़ा वापस दिला दो। मैं अपनी बेटी के बिना नहीं रह सकती। मेरी दूध पीती बेटी को भी मां के दूध की जरूरत है। वह भी अपनी मां के बिना नहीं रह पाएगी।

पति का आरोप खुद छोड़कर गई

हाईकोर्ट सूत्रों के मुताबिक जस्टिस मनमोहन व जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल ने पहले पति से पूछा कि क्या मामला है। पति ने आरोप लगाया कि युवती झगड़ा होने पर खुद ही तीन महीने की दूध पीती बच्ची को घर पर छोड़कर चली गई थी। उसने न तो अपनी प|ी को घर से निकाला और न ही उससे बच्ची छीनी है।

जज ने ऐसे समझाया... इसमें बच्ची का क्या कसूर? आपस में विवाद सुलझाएं

जजों ने पति व प|ी को समझाते हुए कहा कि आपके झगड़े में इस बच्ची का क्या कसूर है? मां-बाप के झगड़े में मासूम को नहीं पीसना चाहिए। बच्ची इतनी छोटी है कि वह मां के दूध पर निर्भर है। आप दोनों को आपस में बातचीत कर इस विवाद को सुलझाना चाहिए। आपके झगड़े में बच्ची मां के दूध से महरूम हो गई है। आप दोनों में से कसूर किसी का भी हो, मगर ज्यादा प्रभावित बच्ची हो रही है। फिलहाल कोर्ट बच्ची को मां के सुपुर्द करने का आदेश जारी कर रही है। मगर साथ ही उसके पिता को भी अपनी बच्ची से मिलने का पूरा कानूनी अधिकार दे रही है। बच्ची का पिता, युवती के घर जाकर उससे मिलेगा। दोनों बातचीत कर विवाद को सुलझाने का प्रयास करें। उनके बीच के इस प्रयास से विवाद सुलझा या नहीं? ये अगली सुनवाई में 20 जनवरी को बताएं।

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