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बच्चे पर पिलर गिरा, इलाज के लिए निगम देगा 1 लाख

एक वर्ष पहले
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जयपुर। जिला उपभोक्ता मंच चतुर्थ ने एक मामले में नगर निगम जयपुर व ठेकेदार रामकल्याण चौधरी पर पार्क के गेट की मरम्मत नही करने के कारण बच्चे पर पिल्लर गिरने से हुए हादसे पर 5 हजार रुपए का हर्जाना व इलाज के 1 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है। मंच ने यह फैसला किरण पथ निवासी राजेश जैन के परिवाद पर दिया है।

परिवादी का कहना है कि वार्ड नम्बर 42 के सेक्टर 36 व 38 के बीच नगर निगम के रखरखाव व नियंत्रण वाले पार्क हनुमान वाटिका के बड़े गेट के क्षतिग्रस्त खम्बे व लोहे के गेट को ठीक करने के लिए मानसरोवर विकास समिति ने बार बार पत्र लिखने के बावजूद सही नही कराए इसी बीच अगस्त 2015 को उसकी 8 वर्षीय पुत्री के ऊपर गेट का पिल्लर गिरने से शरीर मे चोट आई और ऑपरेशन से हाथ व पैर में रॉड डालने व इलाज पर 1 लाख 50 हजार रुपए खर्च हुए। जिसके भुगतान के आश्वासन के बावजूद नगर निगम ने भुगतान नही किया। दूसरी ओर, नगर निगम का कहना था कि पार्क के रखरखाव व दुरुस्तीकरण के लिए कार्य ठेकेदार को दिया हुआ है। इसलिए परिवादी अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी नही है। ठेकेदार का कहना था कि वह सिर्फ बागवानी का कार्य देखता है। निर्माण व मरम्मत के लिए नगर निगम में सिविल शाखा है। इसलिए क्षतिपूर्ती देने की जिम्मेदारी उसकी नही है। मंच ने फैसले में कहा कि भारत भारतीय संविधान के तहत एक कल्याणकारी राज्य है इसलिए राज्य होने के नाते कल्याणकारी योजनाओं के तहत सुविधा कॉलोनीवासियों को दी हुई है। जिसे प्रतिफल के रूप में समझा जा सकता है। इसलिए पार्क के संधारण में उपभोक्ता के प्रति सेवादोष के लिए नगर निगम को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है व परिवादी पार्क सेवा का सेवाप्राप्तकर्ता साबित होता है। वर्कऑर्डर की शर्तों के अनुसार मरम्मत कार्य ठेकेदार का था और कार्य करवाने की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। यानी दोनों की लापरवाही से बच्चे को चोटें आई। इसलिए परिवादी को 1 लाख रुपए इलाज पेट क्षतिपूर्ती के रूप में देने का आदेश दिया जाता है।
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