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राजनीतिक संरक्षण-इंस्पेक्टरों की मिलीभगत की पोल खुली,100 बिल्डिंगों पर कार्रवाई रुकी
मुख्यमंत्री की ओर से जेडीए की अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर जो तंज कसा था, उसका असर एक सप्ताह बाद फिर ठंडा पड़ गया है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद जेडीए ने अवैध हाइराइज बिल्डिंगों पर तोड़फोड़ शुरू की थी। दो बिल्डिंगों पर हुई कार्रवाई ने ही राजनेताओं और अफसरों के संरक्षण की कलई खोल दी। पूरे शहरभर में कार्रवाई को लेकर हुए आरोप-प्रत्यारोप और मिलीभगत के मामले चर्चित रहे।
हालांकि इसके बाद जेडीए ने जगतपुरा में जिस बिल्डिंग को छोड़कर दूसरी पर कार्रवाई करने के लिए खुद के इंस्पेक्टर की गलती मानी थी, न तो उस मामले में कोई जांच पूरी की गई है न ही आगे किसी तरह की कार्रवाई की गई। इसके अलावा पृथ्वीराज नगर, जगतपुरा, सांगानेर, वैशाली आदि एरिया में चिह्नित 100 से ज्यादा अवैध हाइराइज बिल्डिंगों पर कार्रवाई टल रही है। जेडीए कुछ दिन से केवल वही पुराने ढर्रे पर थड़ी-ठेलों के यहां कार्रवाई करके इतिश्री कर रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण अब 16 जोन के विपरीत केवल 6 इंस्पेक्टर (ईओ) बचे हैं।
ढाई हजार नोटिस पेंडिंग, राहत के पीछे निगम चुनाव तो नहीं?
जेडीए ने 2019 में ही अतिक्रमण को लेकर ढाई हजार नोटिस दिए हैं। जोन 5, 9, 10, 11, 14 के अलावा पीआरएन में 100 से 500 तक नोटिस हैं। पीआरएन, सांगानेर, जगतपुरा एरिया में तो अवैध बिल्डिंगें चिह्नित की हुई हैं। जी प्लस 2 और इससे अधिक ऊंचाई वाले अवैध फ्लैट्स पर कार्रवाई के हालात यह है कि 1 जनवरी 2019 से 30 जनवरी 2020 तक 349 नोटिस दिए गए हैं, जिनमें से फिलहाल केवल 17 पर ध्वस्तीकरण और 8 को सील किया गया है।
इंस्पेक्टर कम हैं, स्थिति से मुख्यालय को बता दिया है
इंस्पेक्टर कम हैं, इसके बारे में मुख्यालय को अवगत कराया है। वैसे उनको भी स्थिति का पता है। जब तक इंस्पेक्टर आएं, तब तक बाकी टीम अतिक्रमण रोकने का काम करेगी। शिकायतों पर एक्शन करेंगे? जहां तक जगतपुरा वाली बिल्डिंग पर कार्रवाई का मामला है, उसकी जांच फिलहाल होनी है। -मामन सिंह, एसपी और इंचार्ज, एनफोर्समेंट विंग, जेडीए
राजनीतिक संरक्षण प्राप्त
लोगों से थड़ी पर आया जेडीए
तीन-चार दिन से जेडीए सामूहिक अभियान बताकर केवल थड़ी-ठेले, जालियां जैसी खानापूर्ति की कार्रवाई ही कर पा रहा है। इनके विपरीत शहर में जगह-जगह अवैध हाइराइज बिल्डिंगें खड़ी हो रही है, जिनको न केवल राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है, बल्कि जेडीए के अफसर-ईओ की मिलीभगत के आरोप हैं। उनको छोड़ा हुआ है।
हालात देखिए...खुद की जांच में भी जो अवैध निर्माण साबित उस पर कार्रवाई टाल रहे
जेडीए में अतिक्रमण के हालात पर कार्रवाई का इससे पता लगता है कि आम रास्तों को भी खाली नहीं कराया जा रहा है। मामला जोन 5 स्थित एवरेस्ट विहार के रास्ते पर अतिक्रमण की 6 महीने से शिकायत है। अभी जोन और एनफोर्समेंट खुद की गलती से अलग-अलग रोड मान पट्टे देने की जांच से बच रहे थे। जबकि जांच में रास्ते की स्थिति साफ हो गई तो भी मौके पर कार्रवाई टाली जा रही है। लंबा खींचने के लिए फिर से फाइल चलाने के आरोप हैं। जबकि मामले में खुद चीफ एनफोर्समेंट ऑफिसर निष्पक्ष तौर पर कार्रवाई की बात कह चुके। एसपी, सचिव और जेडीसी तक को हालात बताए जा चुके।
{जगतपुरा में जिस बिल्डिंग को संरक्षण में ईओ दोषी थे, उसकी जांच तक पूरी नहीं हो सकी