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राम का जीवन अनुकरणीय: विद्या सागर

एक वर्ष पहले
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भट्टारक जी की नसियां में चल रहे अष्टान्हिका महापर्व में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के 6वें दिन मुनिश्री विद्या सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में शनिवार सुबह इंद्र-इंद्राणियों ने भक्ति नृत्य कर मंडल पर 512 अर्घ चढ़ाए। इससे पूर्व श्रीजी की शांतिधारा महावीर-मोनू कासलीवाल, विद्या-नरेन्द्र जैन, शांति-विकास काला, पदम देवी-पन्नी देवी परिवार ने की।

संयोजक राजेन्द्र सेठी ने बताया कि मंडल पूजा में इंद्र-इंद्राणियों ने जैन भजनों की मधुर स्वर लहरियों के बीच सिद्ध प्रभु की आराधना कर 512 अर्घ चढ़ाए। धर्मसभा में मुनिश्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि भगवान राम के जीवन को समझकर हमें उसका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने धर्म की रक्षा करते हुए पिता के आदेश को भगवान का आदेश मानकर ग्रहण किया। हमें अपने माता-पिता के आदेश को भगवान का आदेश मानकर पालन करना चाहिए। संयोजक राजेन्द्र सेठी ने बताया कि शाम 6.30 बजे श्रीजी की महाआरती की गई। इसके बाद विधानाचार्य विजय वात्सल्य लखनादौन के प्रवचन हुए। रविवार को मंडल पूजा के तहत 1024 अर्घ चढ़ाए जाएंगे।

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