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आरसीए : लगाई थी डोमिसाइल की शर्त

2 वर्ष पहले
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राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद एड हॉक कमेटी को हटा कर आरसीए अध्यक्ष पद पर सीपी जोशी की बहाली हो गई थी। इसके बाद आरसीए ने नया संशोधित संविधान 21 जनवरी, 2019 को बीसीसीआई के पास भेजा था। इसमें आरसीए का चुनाव लड़ने के लिए डोमिसाइल (राजस्थान का मूल निवासी) होने की शर्त जोड़ दी थी। करीब डेढ़ महीने के बाद यानी 7 मार्च को बीसीसीआई कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) की ओर से सीपी जोशी को एक ईमेल किया गया है। इसकी कॉपी भास्कर के पास है। इस ई-मेल में सीओए ने साफ-साफ लिखा है कि जिस डोमिसाइल की शर्त की बात आपके संशोधित संविधान में की गई है ऐसी कोई शर्त सुप्रीम कोर्ट के 9 अगस्त 2018 के जजमेंट में नहीं है। यह जजमेंट लोढ़ा कमेटी की कम्प्लायंस के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था।

इसलिए सीओए संशोधित संविधान में डोमिसाइल की शर्त जोड़ने के संबंध में अपनी ओर से कोई विचार और कमेंट करने की स्थिति में नहीं है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 15 दिन के अंदर-अंदर बीसीसीआई को यह बताने के लिए कहा था कि बीसीसीआई किस संविधान को वैध मानती है। उल्लेखनीय है कि सीपी जोशी द्वारा 21 जनवरी को भेजे गए संविधान से पहले भी एक संविधान एड हॉक कमेटी की ओर से बीसीसीआई को भेजा गया था।

संशोधित संविधान में इंटरनेशनल खिलाड़ियों को वोटिंग राइट का भी जिक्र नहीं
सीओए ने इस ईमेल में राजस्थान के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी वोटिंग राइट और चुनाव लड़ने का अधिकार दिए जाने की बात कही है। संशोधित संविधान में इस प्वाइंट को आरसीए जोड़ना भूल गया था। इसमें संशोधन के लिए भी आरसीए को कहा गया है। इस बात की पुष्टि करने के लिए भी कहा गया है कि आरसीए का मेंबरशिप स्ट्रक्चर लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के अनुसार है या नहीं।

आरसीए नहीं मानती आरएस नांदू को सचिव, बीसीसीआई सीओए ने ईमेल उन्हें भी भेजा
सीपी जोशी कुछ दिन पहले एक समारोह में साफ-साफ कह चुके हैं कि आरसीए में नांदू नाम को कोई सचिव नहीं है। लेकिन बीसीसीआई शायद ऐसा नहीं मानती। जो मेल सीओए ने सीपी जोशी को भेजा है उसकी एक कॉपी नांदू को भी भेजी गई है। इसका मतलब साफ है कि बीसीसीआई अभी भी नांदू को ही आरसीए का सचिव मानती है। अगर ऐसा नहीं होता तो उन्हें मेल क्यों किया जाता। इस मेल की कॉपी बीसीसीआई सीईओ राहुल जौहरी को भी भेजी गई है।

बोर्ड: सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में शर्त नहीं
सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के अनुसार जल्द कम्प्लायंस हो
सीओए ने यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के अनुसार जल्द से जल्द कम्प्लायंस करने के लिए आरसीए जरूरी कदम उठाए और उसके अनुसार संविधान में संशोधन करे। हालांकि संविधान में संशोधन करने के लिए आरसीए की एजीएम बुलाने की जरूरत पड़ेगी।

बड़ा सवाल-आईपीएल मैच कैसे अलॉट हो जाते हैं
यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक तरफ बीसीसीआई राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) को मान्यता नहीं देती, दूसरी ओर वह आईपीएल मैचों की मेजबानी के लिए आरसीए और राजस्थान रॉयल्स से संपर्क करती है। ऐसा कौन-सा नियम है कि सस्पेंडेड बॉडी को आप आईपीएल की मेजबानी का अधिकार दे दें। आईपीएल के मैचों के आयोजन के लिए एक ट्राई पार्टी एग्रीमेंट होता है। इसमें स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन, आईपीएल फ्रेंचाइजी और बीसीसीआई के बीच एग्रीमेंट होता है। जब आरसीए सस्पेंडेड बॉडी है तो उसके साथ यह ट्राई पार्टी एग्रीमेंट कैसे हो सकता है।

‘जो संशोधन एड हॉक कमेटी ने किए थे, वे ही करने होंगे’
एड हॉक कमेटी ने जो संशोधन करके के बीसीसीआई के पास संविधान भेजा था। वही संशोधन करने के लिए एक बार फिर बीसीसीआई ने लिखा है। साफ है एड हॉक कमेटी का संविधान सही था।

‘डोमिसाइल की शर्त पर बोर्ड को कोई ऑब्जेक्शन नहीं ’
आरसीए के जॉइंट सेक्रेटरी महेंद्र नाहर ने कहा, राजस्थान की क्रिकेट की बेहतरी के डोमिसाइल की शर्त जोड़ी थी, बोर्ड को ऑब्जेक्शन नहीं है। जो भी संशोधन हैं, एजीएम में मंजूरी दी जाएगी।

क्या है विकल्प?
अगर बीसीसीआई आरसीए के साथ ट्राई पार्टी एग्रीमेंट नहीं करती है तो इसका दूसरा विकल्प क्या हो सकता है। एक तो बीसीसीआई सीधे राजस्थान सरकार के स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट से एग्रीमेंट करे। एसएमएस स्टेडियम पर सरकार का मालिकाना हक है। हां, एमओयू जरूर आरसीए के साथ हुआ है।

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