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रामगढ़ मिनरल्स, श्री मिंटेक, हिंदुस्तान जिंक औरजीएल पावर को सीधे माइनिंग लीज देने की सिफारिश
20 हजार करोड़ रु. अगले 50 साल में राज्य सरकार के खाते में प्रीमियम की रकम से आ सकते हंै
आर्थिक तंगी से जूझ रही सरकार को प्रदेश के ब्यूरोक्रेट ही चूना लगाने में जुटे हैं। जिस माइंस की नीलामी करने से राज्य सरकार के खाते में अगले 50 साल में कुल 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम आ सकती थी, उस माइंस को पिछले दरवाजे से आवंटन करने की तैयारी हो चुकी है।
सीधे माइनिंग लीज देने के लिए नियमों में शिथिलता देने को खान विभाग की ओर से प्रस्ताव केंद्रीय खनन मंत्रालय के पास भेजा गया है। हालांकि अभी तक केंद्र के स्तर पर फैसला नहीं किया गया है, लेकिन विभाग की इस कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
2015 में बदल गया था नियम
केंद्र सरकार ने जनवरी 2015 में एमएमडीआर एक्ट में संशोधन कर दिया था, जिसके बाद मेजर मिनरल माइंस का आवंटन ई नीलामी के जरिए ही की जानी थी। राजस्थान में ई नीलामी के जरिए मेजर और माइनर मिनरल माइंस की नीलामी ई नीलामी के जरिए ही की जा रही है, लेकिन सेव केस को आधार बनाकर पूर्व में जिन माइंस को प्रोस्पेक्टिंग लाइसेंस (पीएल) या रिकोनेसेंस परमिट (आरपी) जारी किया गया है। उसके आधार पर सीधे माइनिंग लीज देने के लिए फाइलें सरपट दौड़ाई जा रही है। उदयपुर से लेकर जयपुर और जयपुर से लेकर दिल्ली तक सिफारिश का दौर जारी है। पांच बड़ी माइंस को लीज देने के लिए केंद्रीय खनन मंत्रालय के पास सिफारिश की गई। इनमें से हिंदुस्तान जिंक के लिए तो भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही सिफारिश की गई थी। जबकि रामगढ़ मिनरल के लिए कांग्रेस सरकार में प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। जुलाई 2019 में खान विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव बीडी कुमावत के हस्ताक्षर से नियमों में शिथिलता देने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। गौरतलब है कि बीडी कुमावत को एसीबी ने गिरफ्तार किया था। इसको लेकर काफी समय तक विवाद भी रहा। विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए थे।
पिछले दरवाजे से खान आवंटन की तैयारी नियम में छूट देने के लिए भेजा प्रस्ताव