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मेरा धैर्य जवाब दे रहा, मैं कभी भी विधायक पद से इस्तीफा दे सकता हूं : हेमाराम चौधरी

एक वर्ष पहले
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बाड़मेर के कद्दावर जाट नेता और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हेमाराम चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने पांच मार्च को विधानसभा में खुलकर अपनी पीड़ा बयां की। इसके बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में हेमाराम चौधरी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मेरा धैर्य जवाब दे रहा है। मैं कभी भी विधायक पद से इस्तीफा दे सकता हूं। कांग्रेस की भी सरकार में न तो मेरे कार्यकर्ताओं का काम हो रहा है और न ही मेरी किसी सिफारिश को सरकार में प्राथमिकता के तौर पर रखा जा रहा है। जब मैं क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का काम ही नहीं करा पाऊंगा तो फिर मेरे विधायक पद पर बने रहने का कोई औचित्य भी नहीं है।

ट्विटर पर 14वें नंबर पर ट्रेंड हुआ बेनीवाल का गांधी परिवार पर कटाक्ष

जयपुर | गांधी परिवार के लाेगाें काे कोरोना वायरस की जांच करवाने से जुड़ी टिप्पणी ट्विटर पर 14वें नंबर पर ट्रेंड हुई। हालांकि एक माैका एेसा भी अाया जब ये नंबर 1 अाैर नंबर 10 पर ट्रेंड हुई। लाेकसभा में ये बात नागाैर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने की थी। इस टिप्पणी काे लेकर बेनीवाल का कहना है कि उन्हाेंने कोई अमर्यादित टिपण्णी नही की थी। गाैरतलब है कि गांधी परिवार के लाेगाें के हेल्थ की जांच एयरपाेर्ट पर ही हाे चुकी थी । हालांकि इस बात की जानकारी किसी भी कांग्रेसी ने सदन में नहीं दी थी। कांग्रेसियाें ने ये जानकारी क्याें नहीं दी, ये भी साेश्यल मीडिया में ट्रेंड हुअा।


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हेमाराम चौधरी का कहना है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही मेरी लगातार उपेक्षा की जा रही है। इसी उपेक्षा से तंग आकर मैं 14 फरवरी 2019 को विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र सौंप दिया था, लेकिन जोशी ने मेरे त्यागपत्र को स्वीकार नहीं किया। स्पीकर ने भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार में सुनवाई होगी। स्पीकर के अनुरोध पर मैंने इस्तीफा वापस लिया। मैं तो चुनाव ही नहीं लड़ना चाहता था, लेकिन संगठन और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे के दबाव के बाद चुनाव लड़ा। 2013 में भी मैं चुनाव लड़ना नहीं चाहता था, लेकिन राहुल गांधी ने मुझे फोन किया था। तब चुनाव लड़ा था। चौधरी के मुताबिक, 40 साल के राजनीतिक करियर में मैंने कभी चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मांगा, लेकिन अब मेरा विश्वास हिल गया है। क्षेत्र की जिस जनता ने मुझे सेवा करने के लिए चुना है। उसी जनता का मैं काम न करा पाऊं तो फिर मेरे विधायक होने कोई अर्थ नहीं है। संगठन से मेरी कोई नाराजगी नहीं है। संगठन के 5 साल के कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि फिर से प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी, लेकिन सरकार बनने के बाद भी कार्यकर्ताओं का काम न हो तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या है। एक उदाहरण देता हूं मेरे क्षेत्र की एक महिला पुलिस कांस्टेबल पिछले कई सालों से झालावाड़ में सेवाएं दे रही है। उसके तबादले के लिए मैंने सिफारिश की, लेकिन नहीं किया गया। कार्यकर्ताओं की यूं ही उपेक्षा होती रही तो कांग्रेस को कोई नहीं बचा सकता।

‘मैं तो चुनाव ही लड़ना नहीं चाहता था, संगठन और प्रदेश प्रभारी ने बोला तो तैयार हुआ’

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