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शहीद, खिलाड़ियों के बाद अब लोक कलाकारों को भी भूखंड देगी सरकार

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में अब तक शहीदों, परमवीर चक्र-वीर चक्र प्राप्त सैनिकों, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को राज्य सरकार भूखंड देती रही है। लेकिन पहली बार कलाकारों को भूखंड आवंटन की योजना तैयार की गई है। अब किसी भी प्रकार के पद्म पुरस्कार प्राप्त कलाकार से लेकर लोक कला में पुंगी बजाने वाले कलाकारों तक को सरकार की ओर से 200 वर्गमीटर के भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इसको लेकर नगरीय विकास एवं हाउसिंग विभाग की तरफ से प्लान फाइनल किया जा रहा है। कैबिनेट स्वीकृति के साथ ही इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। प्रदेश में लोक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले 2 हजार से अधिक कलाकार हैं।

200 वर्गमीटर का भूखंड मिलेगा

कलाकार की कैटेगरी तय करने में उलझे अफसर
सामान्यतया कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार प्राप्त कलाकार को इस कैटेगरी में योग्य माना गया है। लेकिन किस किस फील्ड के कलाकारों को इसमें मान्यता दी जाएगी इसको लेकर यूडीएच अफसर असमंजस में हैं। कला के कई प्रकार हैं। फौरी तौर पर पद्मश्री, पद्मविभूषण, पद्मभूषण अवार्ड प्राप्त किसी भी कला के कलाकार, राष्ट्रीय कला पुरस्कार प्राप्त कलाकार, स्थानीय कला से राष्ट्र स्तर पर जाने माने कलाकारों को मान्यता पर विचार चल रहा है।





लेकिन अफसरों का कहना है कि कला एवं संस्कृति विभाग को पूछना पड़ेगा कि कलाकार कितने प्रकार के होते हैं और भारत में कितनी कलाओं को मान्यता है?

हर शहरी क्षेत्र में रिजर्व प्राइज पर देंगे भूखंड
अलग अलग कैटेगरी के तहत सरकार भूखंड आवंटन के प्रावधान करती रही है। अब कलाकारों के लिए रिजर्व प्राइज पर भूखंड आवंटन की पॉलिसी बनाई गई है। जैसे किसी शहर में स्थान विशेष की रिजर्व प्राइज 2 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर है तो उस स्थान पर 200 वर्गमीटर का भूखंड 4 लाख रु. में आवंटित किया जाएगा।









ऐसे भूखंडों की बाजार दरें चाहे कुछ हो।

साहित्यकार को शामिल करने पर अटक रहा पेच
सरकारी विभाग के तौर कला साहित्य एवं संस्कृति एक साथ माने जाते हैं। लेकिन भूखंड आवंटन में कला को सम्मान स्वरूप भूखंड आवंटन का प्लान बनाया गया है। राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार या साहित्य एवं संस्कृति के पोषण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त लोगों को शामिल किया जाए या नहीं, इस पर पेच फंस रहा है।









प्रारूप पर अंतिम फैसला मंत्री की हरी झंडी के साथ ही कैबिनेट द्वारा किया जाएगा।

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