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गोविंददेवजी मंदिर में मनाया डोल महोत्सव, चांदी के झूले में विराजमान हुए ठाकुरजी
शहर के आराध्यदेव गोविंद देवजी मंदिर में धूमधाम से होली खेली गई। फागोत्सव के तहत मंदिर प्रांगण में कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसी बीच ठाकुरजी को फागोत्सव की थकान उतारने व आराम कराने के लिए गोविंद देवजी सहित शहर के कई मंदिरों में बुधवार को डोल उत्सव मनाया गया। मंदिर प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि गौर गोविंद जी को चांदी के झूले में विराजमान करवाकर झूलाया गया। वहीं फूलों से ही सेवा कार्य किया गया। विशेष तरह के व्यंजनों व ठंडाई का भाेग भी लगाया गया। वहीं गोविंद देवजी मंदिर में गोरांग महाप्रभु की जयंती भी मनाई गई। मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने गौरांग महाप्रभुजी का पंचामृत अभिषेक किया। इसके बाद नई पोशाक धारण कराकर पुष्पों से श्रृंगार किया गया। महाआरती के आयोजन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।
सरस निकुंज में पदों से रिझाया: शुक संप्रदाय की प्रधान पीठ सरस निकुंज सुभाष चौक पानो का दरीबा में बुधवार को फूल डोल महोत्सव मनाया गया। शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में भक्तों ने ठाकुर जी की मनोहर झांकी दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने नृत्य करके पदों का गायन किया।
गलता पीठ में खेली फूलों की होली, जल बचाने का संदेश दिया
उत्तर भारत की प्रमुख श्री वैष्णव पीठ श्री गलता जी में गलता पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य महाराज के सान्निध्य में फागोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर जल बचाने का व रसायन मुक्त होली मनाने का संकल्प लिया गया। युवराज स्वामी राघवेन्द्र ने बताया कि श्री गलता पीठ में तिलक व पुष्प होली खेली गई। ठाकुर जी के समक्ष विभिन्न आयोजन हुए। इस दौरान किसी भी प्रकार के रंग रसायन आदि का प्रयोग नहीं लिया गया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण उत्साह से उत्सव का आनंद लिया। विदेशी सैलानियों में भी महोत्सव के प्रति उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं को गुलाल का तिलक लगाया गया व सैकड़ों किलो पुष्प की पंखुडिय़ों से होली खेली गई। राजस्थानी युवा चंग मंडल के कलाकारों द्वारा भगवान के गीतों की मनभावन प्रस्तुतियां दीं गईं। गीतों पर श्रद्धालुओं व सैलानियों ने नृत्य किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के साथ-साथ नगर के अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। भगवान को भोग लगने बाद सभी ने प्रसादी ग्रहण की।
जगदीशजी को लगा भोग
गोनेर के श्री लक्ष्मी-जगदीश मंदिर में वार्षिक मेला का आयोजन हुआ। महंत हनुमान दास के सान्निध्य में भगवान श्रीलक्ष्मी जगदीश जी, चारभुजानाथ, शालिगरामजी और बिहारीजी को फागुनी रंग से रंगी रंग बिरंगी पोशाक धारण कराई गई। इस अवसर पर वार्षिक मेले में श्रद्धालु एक-दूसरे को गुलाल लगाते, दंडवत और परिक्रमा करते हुए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने जगदीश महाराज के दर्शन किए।