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लोहा मंडी का सपना धराशायी... क्योंकि जेडीए को जिनसे जमीन लेनी है, उनकी अनसुनी कर 15 साल से खुद की इकलौती प्लानिंग पर अड़ा

एक वर्ष पहले
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व्यापार को बढ़ावा देने और ट्रैफिक, एक्सीडेंट के हालात से निजात के लिए राज्य सरकार ने जो घोषणाएं और प्लानिंग की हैं, उन्हें पूरा करने में जेडीए फेल रहा है। 15 साल से लोहा मंडी योजना का सपना जेडीए अफसरों की नाकामी के चलते अधूरा है। 134 हेक्टेयर जमीन पर स्टील मर्चेंट व्यापारियों की मांग पर सीकर मेन रोड पर योजना का ख्वाब देखा गया था। भाजपा सरकार में प्रभावित लोग कई बार जेडीए के चक्कर काटते रहे। कांग्रेस सरकार में यूडीएच मंत्री ने कोर्ट से बाहर लोगों से बात कर ऐसी विवादित योजनाओं का समाधान निकालने को कहा। जेडीसी टी. रविकांत ने भी इस ओर संबंधित जोन को निर्देश देते रहे, लेकिन अफसर केवल हाथ पर हाथ धरे कोर्ट के जरिए ही समाधान की बात कहते आ रहे हैं।

तीन चरणों में जमीन का स्टेटस और विवाद भी


1 फेज 47.17 हेक्टेयर भूमि

सरकारी भूमि: 25.33 हेक्टेयर

खातेदारी भूमि: 21.84 हेक्टेयर

भूखंड: 391

आवंटन दर: 1495 रु. प्रति वमी

विवाद: कोई नहीं

2 फेज- 36.48 हेक्टेयर भूमि

सरकारी भूमि: .3 हेक्टेयर

खातेदारी भूमि: 36.45 हेक्टेयर

भूखंड: 305 हार्डवेयर मंडी और 120 भूखंड बिजली व्यापार मंडी

आवंटन दर: 1600 रु. प्रति वमी

विवाद: हाईकोर्ट का स्टे आने से 10.42 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा पत्र जारी नहीं।

3 फेज: 50.45 हेक्टेयर भूमि

सरकारी भूमि: 0

खातेदारी भूमि: 50.45

भूखंड: 208 व्यावसायिक भूखंड व खातेदारों को 15% भूमि के बदले 262 भूखंड सेनेटरी मंडी के लिए।

आवंटन दर: 1600 रु. प्रति वमी

विवाद: स्टे होने से 42.88 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा पत्र जारी नहीं।

लोहामंडी के 3 फेज में अवाप्त भूमि का विवरण

अवाप्त भूमि 134.10 हेक्टेयर (108.74 खातेदारी और 25.36 सिवायचक)

स्टे से प्रभावित हेक्टेयर: 60.22

खातेदारों के समर्पण: 24.02 हेक्टेयर

कब्जा मिला: 19.93 हेक्टेयर

134 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर सोची गई प्लानिंग (एरिया एनालासिस)

लैंड यूज : एरिया स्क्वा. मीटर : प्रतिशत

रेजीडेंशियल : 73316.11 : 5.42

कॉमर्शियल : 304516.61 : 22.49

ओपन एरिया : 75062.30 : 5.55

हम प्लानिंग के मुताबिक 15% मिक्स लैंड यूज देने को तैयार हैं, लेकिन वे 25% (20 रेजीडेंशियल और 5 कॉमर्शियल) पर अड़े हैं। जेडीए ने जो प्लानिंग की है, उसमें इसके लिए जगह कम पड़ रही है। अब कई बार समझाइश की कोशिश कर चुके, ऐसे में कोर्ट से मामला सुलझेगा। क्योंकि उनकी मांग पूरी करते हैं तो प्लानिंग के लिए जमीन ही नहीं बचती।
-राकेश कुमार, आरएएस और संबंधित उपायुक्त, जेडीए

जरूरत : ट्रैफिक-एक्सीडेंट-प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए सीकर मेन रोड पर लोहा मंडी तैयार होनी थी**
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