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करोड़ों की 104 बीघा अवाप्तशुदा जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा
{बैकडेट में सोसायटियों ने कागजों में आवासीय योजना विकसित करके पट्टे जारी कर दिए
मानपुर देवरी उर्फ गोल्यावास में 104 बीघा अवाप्तशुदा जमीन पर भूमाफियाओं ने मिलीभगत कर सोसायटियों के बैक डेट में पट्टे काटने का मामला आया है। अब यहां जेडीए अफसरों की सांठगांठ से सोसायटियों ने नियमन शिविर की तैयारी की है। खास यह कि अवाप्त जमीन को स्टे के बावजूद काश्तकारों ने भूमाफियाओं को बेच दी। आरोप है अमृतपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति और गणपति नगर विकास समिति के माध्यम से फर्जीवाड़ा कर नियमन शिविर लगवाने की तैयारी की जा रही है।
पृथ्वीराज नगर की अवाप्तशुदा भूमि है जिसका अवार्ड सरकार 1991 में ही जारी कर चुकी है। अवाप्ति की 1988-89 में अधिसूचनाएं प्रकाशित करने के बाद अवार्ड प्रेषित किया गया। यह मामला कोर्ट में है। बाद में इस जमीन को सोसायटियों से इकरारनामा करते हुए उन्हें सपुर्द कर दिया गया। हालांकि जमीन को मुआवजा लेने के लिए सभी खातेदारों ने जेडीए में आवेदन कर रखा था।
4. पृथ्वीराज नगर योजना के नियमन के लिए सहकारी समितियों व विकास समितियों को जेडीए में समस्त रिकॉर्ड जमा कराने की अंतिम तिथि 18 जनवरी 2017 निर्धारित की थी। लेकिन इस जमीन का खातेदारों द्वारा अमृतपुरी गृह निर्माण सहकारी समिति काे बेचान करने का कोई दस्तावेजी प्रमाण समिति के पास नहीं होने के कारण गणतपति नगर विस्तार योजना के संबंध में कोई रिकाॅर्ड जमा नहीं करवा पाएं।**
3. इस अवाप्त जमीन पर भूमाफियाओ ने 2018 में 700, 800 व 900 वर्गगज के टूकड़ों में बांटकर गणपति नगर विस्तार नाम से बैकडेट में अमृतपुरी गृह निर्माण सहकारी समिति के पट्टों का फर्जी रिकॉर्ड बनवा लिया। खाली जमीन चार दीवारी की जा रही है।
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2. जब एक आवासीय योजना के प्रस्ताव को जेडीए ने खारिज कर दिया तो भूमाफियाओं ने बिना दस्तावेजी प्रमाण के वादग्रस्त भूमि को अमृतपुरी गृह निर्माण सहकारी समिति को बेचान बताते हुए बैक डेट में वर्ष 1999 के पट्टे गणपति नगर विस्तार के नाम से जारी कर दिए। वहीं एकाएक गणपति नगर विस्तार विकास समिति की आेर से सदस्यों की सूची प्रस्तुत कर नियमन शिविर लगवाकर अवाप्त भूमि को हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। **
1. भूमि अवाप्ति के बाद 1991 में जारी अवार्ड के लिए सोसायटी ने दावा क्यों नहीं किया। इसके बाद 2002 में खातेदारों को मुआवजा देने के संबंध में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर आपत्तियां मांगी थी, तब भी सोसायटी ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई। जब काश्तकारों द्वारा विवादित जमीन को जेडीए में समर्पित करने का आवेदन प्रस्तुत किया तब अन्य काश्तकारों की तरह हाउसिंग सोसायटी ने आपत्ति दर्ज क्यों नहीं की। **
सवाल : सोसायटी ने न दावा किया, न आपत्ति दर्ज कराई
{जेडीए अफसरों की मिलीभगत से सोसायटियों ने नियमन शिविर लगवाने की तैयारी की