कई लड़ाइयों में जांबाजी दिखा चुके सगत सिंह के किस्से अब किताबों में होंगे

Jaipur News - सिटी रिपोर्टर

Jul 14, 2019, 08:35 AM IST
सिटी रिपोर्टर
परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह के 100वें जन्म दिवस को मनाते हुए शनिवार को उनके स्मारक का अनावरण किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल वही शख्स थे, जिन्होंने 1971 में ‘मेघना हेली ब्रिज’ एरियल अॉपरेशन से बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद करवाया। साथ ही पुर्तगालियों से गोवा को आजाद करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। शनिवार को क्वींस रोड स्थित झारखंड मोड़ पर सप्त शक्ति कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन ने स्मारक को अन्वील किया।

डीबी गुप्ता ने मांगी सगत सिंह से जुड़ी घटनाओं की जानकारी

इस मौके पर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन ने कहा, सगत सिंह राजस्थान के वीर योद्धा रहे। जिनके बारे में स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए। उनकी बात का समर्थन करते हुए राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी डीबी गुप्ता ने सगत सिंह के जीवन से जुड़ी अहम घटनाओं की जानकारी मांगी है। इन सभी जानकारियों के आधार पर वे शिक्षा विभाग से बातचीत कर उनकी जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल करेंगे। इससे भावी पीढ़ी को उनके बारे में जानने का मौका मिलेगा।

पिता अपनी यूनिट की चिंता बच्चों की तरह करते थे...

सगत सिंह के बेटे कर्नल रणविजय सिंह ने अपने पैरेंट्स से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, मेरे जन्म से पहले मां गांव कुसुमदेसर गई थी। मां समय पर हॉस्पिटल नहीं पहुंच पाई और मेरा जन्म कैमल कॉट में हुआ। पिता ने 6 साल की उम्र में मुझे मेयो कॉलेज पढ़ने के लिए भेज दिया। वे हमेशा से हमारी एजुकेशन को लेकर काफी स्ट्रिक्ट थे। वे चाहते थे मैं सिविलियन की जिंदगी से हटकर फौजियों की जिंदगी को करीब से महसूस करूं। इसीलिए अकसर जहां उनकी पोस्टिंग होती, वे अपनी यूनिट से मुझे मिलवाते थे। पिता से इंस्पायर होकर ही मैंने डिफेंस जॉइन किया। मुझे याद है, वे हमेशा अपनी यूनिट की चिंता अपने बच्चों की तरह किया करते थे।

भारत-चीन के बीच नाथू ला की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई

लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह का जन्म चूरू जिले के कुसुमदेसर गांव में 14 जुलाई 1919 को हुआ था। उन्होंने 1936 में बीकानेर के वाल्टर नोबल्स हाई स्कूल से शिक्षा हासिल की। उन्होंने 1971 में बांग्लादेश की आजादी में अहम भूमिका निभाई। भारत-चीन के बीच 1967 के नाथू ला की लड़ाई में भी अपना योगदान दिया। 1966 में मिजोरम को जब अलग देश बनाने की कवायद चल रही थी, तब सगत सिंह ने मिजोरम में चल रहे काउंटर टेररिज्म के हालातों पर काबू पाया। 1962 के बाद 1967 में इंडियन आर्मी ने चाइनीज आर्मी का मुकाबला किया, और डट कर नाथू ला को अपने कब्जे में किया।

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