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जिसने मोहब्बत की हाे वही गा सकता है ठुमरी : मालिनी

2 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर जयपुर

प्रभा खेतान फाउंडेशन की \\\"एक मुलाकात\\\' सीरीज के तहत गुरुवार काे पद्मश्री से सम्मानित लाेक गायिका मालिनी अवस्थी ने संस्कृति प्रेमियों से अपनी म्यूजिक जर्नी के एक्सपीरियंस शेयर किए। उन्होंने कहा कि एेसा कहा जाता है कि ठुमरी का अर्थ ठुमकने से है जाे नृत्य के लिए सबसे बेहतरीन है, लेकिन हमने जाे महसूस किया उसके अनुरूप ठुमरी अहसासात अाैर रुहानियत की गायकी है। इसलिए जिसने माेहब्बत की हाे वही ठुमरी गा सकता है। यही वजह है कि मेरी नजर में ठुमरी सबसे कठिन गायकी है।

लाेक गीत गाना शुरू किया ताे हुई अालाेचना
अायकर अायुक्त अाैर सिंगर राेली अग्रवाल से अाईटीसी राजपूताना में अायाेजित बातचीत में उन्होंने कहा कि शुरुअात में वाे शास्त्रीय संगीत ही गाती थीं अाैर अंत में लाेक विधा से जुड़ी रचनाएं पेश करती थीं लेकिन लाेक रचनाअाें में उन्हें अनुभूतियाें का खजाना नजर अाया ताे लगा कि क्याें न इसी काे पूरा जीवन बना लूं। मेरे इस निर्णय की अालाेचना भी खूब हुई लेकिन जब इसमें रम गई ताे ये ही मेरा अाेढ़ना बिछाैना बन गए।


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सुनाए ठुमरी के मुखड़े
इस माैके पर मालिनी अवस्थी ने कई ठुमरियाें के मुखड़े भी सुनाए। इस कड़ी में अमीर खुसराे की रचना अम्मा मेरे बाबा काे भेजाें री कि सावन अाया अाैर माेरा सैंया बुलावे अाधी रात नदिया बैरन भई प्रमुख थीं। उन्होंने लाेगाें काे इन रचनाअाें में छिपे भावाें काे भी विस्तार से समझाया।

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