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स्पीकर से कहा- पहली बार कार्य सलाहकार समिति को बायपास कर 26 तक बढ़ाया सत्र

एक वर्ष पहले
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विधानसभा का मौजूदा सत्र अब 16 मार्च की जगह बढ़ाकर 26 मार्च कर दिया गया है। पहले 16 मार्च को ही मौजूदा सत्र की अंतिम बैठक होनी थी। अब 25 मार्च तक विधानसभा का अवकाश रहेगा और 26 मार्च को सरकार सदन में तीन विधेयक पारित करवाएगी। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब बिना कार्य सलाहकार समिति की बैठक के सत्र की समयावधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। भाजपा विधायक इसके विरोध में स्पीकर डॉ.सीपी जोशी से भी मिले। लेकिन स्पीकर ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से सत्र को 16 मार्च की जगह 26 मार्च तक बढ़ाया गया है। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अगर काई वजह भी थी तो उसके लिए पहले कार्य सलाहकार समिति में चर्चा होनी चाहिए थी। समिति को बाईपास कर सरकार अपने स्तर पर ही सदन की समय सीमा बढ़ाने का फैसला कैसे ले सकती है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि एमपी में 16 मार्च को फ्लोर टैस्ट होना है और प्रदेश के ज्यादातर नेता दौरान एमपी या दिल्ली में मौजूद रहेंगे।

विधानसभा में गूंजा अवैध बजरी खनन का मामला

प्रदेश में अवैध बजरी खनन का मुद्दा शुक्रवार को विधानसभा में भी गूंजा। उद्योग मंत्री परसादी लाल मीना ने प्रश्नकाल में खान मंत्री की ओर से जवाब देते हुए कहा कि कपासन विधानसभा क्षेत्र में अनियमित रूप से बजरी खनन के मामले में उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दायर की गई है। इस संबंध में गठित सेन्ट्रल एम्पॉवर्ड कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि कपासन विधान सभा क्षेत्र में बजरी ठेकेदारों द्वारा अवैध खनन करने एवं अन्य अनियमितताओं की शिकायत की जांच की गई। विभाग के अधिकारी जब मौके पर गए तो उन्हें अधिक मात्रा में खनन करने, 3 मीटर से अधिक गहराई में खनन करने तथा खोदे गए गड्डों को नहीं भरने संबंधी अनियमितताएं मिली। उनकी रिपोर्ट के आधार पर मंशापत्र एवं अस्थाई कार्यानुमति को निरस्त किया गया।

उन्हाेंने बताया कि कपासन विधानसभा क्षेत्र में तीन अलग-अलग फर्म हैं जिनके कार्यानुमति निरस्त की गई है। इन फर्मों को वर्ष 2013 में खनिज बजरी के खनन के लिए कार्यानुमति प्रदान की गई थी और अवैध खनन के संबंध में एक सितंबर 2015 को नोटिस जारी किया गया।

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