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499 साल बाद अनूठा योग, यह होली हरेगी अापके शोक और रोग
होलिका दहन गोधूलि वेला में श्रेष्ठ
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 9 मार्च को अलसुबह 03:03 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त:
9 मार्च रात 11:17 बजे
स्वरािश में रहेंगे शनि व गुरु
पं. रामवतार मिश्र ने बताया कि इस बार होली के दिन न्याय के देवता शनि व देवताओं के गुरु बृहस्पति स्वराशि में रहेंगे। देवगुरु धनु राशि में और शनिदेव मकर राशि में होंगे। ऐसा संयोग करीब 499 साल पहले 3 मार्च 1521 में हुआ था।
जयपुर | रंगांे का पर्व आ चुका है... वह भी 499 साल बाद हुए अनूठे संयोग के साथ। न्याय के देवता शनि और देवताओं के गुरु बृहस्पति स्वराशि में रहेंगे। यह योग भक्तों के शोक और रोग हरने वाला है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन आपसी रिश्तों में प्रेम सद्भाव का संदेशवाहक होलिका दहन सोमवार को भद्रा रहित प्रदोषकाल में निर्विवाद रूप से होगा। प्रदोषकाल में ऐसा मंगलकारी योग लंबे अर्से बाद हो रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. रामवतार मिश्र के अनुसार होलिका दहन गोधूलि वेला में करना श्रेष्ठ रहेगा। पंचांग के मुताबिक होलिका दहन के दिन भद्रा दोपहर 1:11 बजे तक रहेगी।
{महिलाओं को होलिका पूजन
दोपहर सवा बजे बाद करना चाहिए।
होलिका दहन मुहूर्त: शाम 6:26 से 8:52
अवधि:
2:26 घंटे