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महिलाएं दर्द से हिम्मत हारने पर ही करवाएं पेनलैस डिलीवरी

2 वर्ष पहले
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हैल्थ रिपोर्टर जयपुर

मां बनना एक महिला के लिए सुखद एहसास है। डिलीवरी के समय होने वाले लेबर पेन से कई बार महिलाएं इतना घबरा जाती हैं। वे दुबारा मां नहीं बनना चाहती है। आजकल डिलीवरी कों दर्द रहित और आसान बनाया जा रहा है। ताकि लेबर पेन की वजह से महिलाएं मां बनने में हिचकिचाएं नहीं। गाइनीकोलॉजिस्ट के मुताबिक, लेबर पेन एक नेचुरल प्रोसेस है। जितना संभव हो पाए महिला को यह दर्द सहना चाहिए, लेकिन जब वह दर्द सहते हुए थक जाए और उसकी एनर्जी खत्म हो जाए। दर्द की वजह से होने वाली बेचैनी व घबराहट से वो हिम्मत छोड़ दें। लेबर प्रोसेस धीमा पड़ना शुरू हो जाए तो हमें पेनलेस डिलीवरी का �ऑप्शन अपनाना चाहिए। सीजेरियन की तुलना में यह मां के लिए ज्यादा बेहतरीन है। इसके लंबे समय तक मां पर किसी तरह के साइड-इफेक्ट्स नहीं होते हैं। मां और बच्चे दोनों हैल्दी रहते हैं। वहीं, आजकल महिला�ओं में दर्द सहने की क्षमता कम हो रही है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज और एक्युप्रेशर मसाज बढ़ाएगी दर्द सहने की क्षमता
डिलीवरी को अासान बनाने में प्रणायाम, योगा और यौगिक क्रियाएं मददगार है। गर्भावस्था से ही इन्हें शुरू करने पर मसल्स लचीली और खुल जाती है। इससे यूटरस का मुंह आसानी से खुलने पर बच्चा जल्दी डिलीवर होता है। डिलीवरी में ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। पेन आने पर गहरी सांस लें। इससे दर्द कम महसूस होगा। डिलीवरी के दौरान मां की कमर पर आजकल मसाज दी जाती है। वहीं, एक्युप्रेशर के जरिए नर्व प्वांइट्स पर दबाव डालने से दर्द कम किया जाता है।

वाटर बर्थ नेचुरल प्रोसेस, पानी करेगा मसल्स रिलेक्स
आजकल वाटर बर्थ का ऑप्शन भी ट्रेंड में आ चुका है। यह एक कुदरती तरीका है। इसमें मां को गर्म पानी में रखने से मसल्स रिलेक्स होती हंै। 60-70 परसेंट तक कम दर्द महसूस होता है। ट्रेडिशनल तरीके पर आधारित यह तकनीक पहली बार 1805 में फ्रांस में अपनाई गई थी। गर्म पानी से योनी की मांसपेशियां रिलेक्स होती हैं। वहीं, पानी में शरीर हल्का पड़ने से दर्द झेलने की शक्ति बढ़ती है। बच्चेदानी में �ऑक्सीजन ज्यादा पहुंचने सेेेेे मसल्स रिलेक्स होने से डिलीवरी आसान होती है। इसमें पानी में दर्द सहन करके प्रसव बैड पर भी करवा सकते हैं। कई केसों में देखा गया है कि एंटीबॉयोटिक्स लेने की भी जरूरत नहीं पड़ती है।

किन साइडइफेक्ट्स का खतरा
बच्चा सांस से पानी खींच लें, नाल का टेढ़ा होना।

कब नहीं करवाएं वाटर बर्थ: बच्चा उल्टा होने पर, पानी पहले छूटने पर, समय से पूर्व प्रसव, हाई बीपी और हर्पीज इंफेक्शन

एक्सपर्ट पैनल: डॉ. �ओ.बी. नागर, डॉ. स्मिता वैद, डॉ. निशा मंगल, गाइनीकोलॉजिस्ट, जयपुर।

90%
तक लेबर पेन में मिलेगा रिलीफ
पेनलेस डिलीवरी में मां को रीढ़ की हड्डी से एनीस्थिसिया देकर नर्व को ब्लॉक कर दिया जाता है। इंजेक्शन के जरिए दी जाने वाली इस दवाई का असर तीन से चार घंटे तक रहता है। दर्द में 80-90 परसेंट तक रिलीफ मिलता है। लेबर का प्रोसेस सामान्य रहता है। हल्का रिलीफ आने के बाद भी महिला इसे कंटीन्यू करना चाहती है तो थोड़ी-थोड़ी दवाई डालकर टॉप अप किया जाता है। मां के रिलेक्स और उसे एनर्जी महसूस होने पर वो आसानी से बच्चा डिलीवर कर पाती है। इस दौरान कभी-कभी मां का ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। वहीं, बच्चे के दिल की धड़कनें बढ़ सकती हैं। यह बहुत शॉर्ट टर्म होता है। कुछ समय बाद मां और बच्चे की स्थिति दुबारा सामान्य हो जाती है।

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