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हां, हमें गाेल्ड पसंद है

एक वर्ष पहले
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अपूर्वी सिंह चंदेला

महिला दिवस विशेष सीरीज -3

कृष्णा पूनिया

शूटर, अर्जुन अवाॅर्डी

डिस्कथ्रोअर, पद्मश्री, अर्जुन अवाॅर्डी

हमारे लाए गोल्ड की चमक सिर्फ हमारे नहीं, पूरे देश के चेहरे पर दिखाई देती है। इसी चमक से देश की हम जैसी कई और बेटियों के रास्ते रोशन हो जाते हैं।

हमारी जूलरी गाेल्ड, सिल्वर या ब्राेंज में बनेगी यह टूर्नामेंट्स में हमारी जीत तय करती है। हां, हमें गाेल्ड ही जीतना पसंद है।

लाेग अक्सर कहते हैं कि हम महिलाअों काे गाेल्ड जूलरी बहुत पसंद है। वर्ल्ड गाेल्ड काउंसिल के मुताबिक दुनिया का सबसे ज्यादा 25000 टन साेना भारतीय परिवाराें के पास है। इसका एक बड़ा हिस्सा महिलाअाें की जूलरी का है... बिल्कुल सच। देश की नामचीन खिलाड़ी कृष्णा और अपूर्वा को भी गोल्ड पसंद है। लेकिन खेल के मैदान में जीता हुआ गोल्ड मेडल...इनकी पसंद गाेल्ड जलरी नहीं गाेल्ड मैडल है। कृष्णा पूनिया ने 46 वें ओपन नेशनल एथलेटिक्स में गाेल्ड मेडल जीता। दिल्ली 2010 काॅमनवेल्थ गेम्स में ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स में गाेल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला एथलीट बनीं। कृष्णा फिलहाल विधायक भी हैं। इसी तरह जयपुर की अर्जुन अवाॅर्डी अपूर्वी चंदेला ने 2012 में नेशनल चैम्पियनशिप में गाेल्ड मेडल जीता। ग्लासगो में आयोजित काॅमनवेल्थ गेम्स में गाेल्ड मेडल जीता।

देख लीजिए इन्हें गोल्ड कितना पसंद है और कौन सा...
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