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चुनाव / बगावत थामने को मप्र में 39 विधायकों के परिवारों को टिकट, राजस्थान में यही फॉर्मूला लाएगी भाजपा



Rajasthan polls : BJP to act in MP formula
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Rajasthan polls : BJP to act in MP formula

  • राजस्थान में 20 से ज्यादा विधायक परिवार के लिए मांग रहे टिकट 
  • बेटे के लिए टिकट मांग रहे है केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 10:37 AM IST

जयपुर.  विधानसभा चुनावों में टिकट काटे जाने से नाराज बागियों को थामने के लिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान में भी एमपी का फार्मूला लागू कर सकता है। एमपी में भाजपा ने बागियों से निपटने के लिए वंशवाद का सहारा लिया है। जिन विधायकों के टिकट काटे गए हैं उनमें से लगभग 39 के रिश्तेदारों को टिकट दिए गए हैं।

85 से 100 विधायकों के कट सकते हैं टिकट

  1. प्रदेश में इस बार सरकार के खिलाफ माहौल को बदलने के लिए 80 से 100 विधायकों  के टिकट काट जा सकते हैं, लेकिन इसका उल्टा असर भी हो सकता है। जिनके टिकट कटेंगे उनकी बगावत से भी पार्टी को निपटना होगा। राजस्थान में भी भाजपा में लगभग 20 विधायक अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट मांग रहे हैं। विश्वनाथ मेघवाल अपने पत्नी डॉ. विमला के लिए टिकट मांग रहे हैं।

  2. गोपाल जोशी ने भी अपने परिवार के लिए टिकट मांगा था। लादू राम विश्नोई अपने पुत्र के लिए मांग रहे हैं। जनजाति मंत्री नंदलाल मीणा अपने बेटे हेमंत मीणा के लिए टिकट मांग रहे हैं। राजस्व मंत्री अमराराम के बेटे अरुण भी बाड़मेर में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं।

  3. श्रम मंत्री जसवंत यादव तो पहले ही अपनी सीट से अपने बेटे को चुनाव जितवाने की अपील कर चुके हैं। नरपत सिंह राजवी बेटे के लिए, किशनाराम नाई पोते के लिए, गुरजंट सिंह भी पोते के लिए, सुंदरलाल काटा बेटे के लिए, लादूराम विश्नोई अपने बेटे देवी सिंह भाटी अपनी पुत्रवधु के लिए टिकट मांग रहे हैं। 

  4. 23 सीटों पर जीत-हार का अंतर 3% रहा

    बीते चुनावों में भाजपा की लहर के बाद भी 23 सीटें ऐसी थीं जहां बागियों की वजह से जीत-हार का अंतर कुल वोटों के 3 प्रतिशत से भी कम रहा था। 2008 में 6 सीटों के अंतर से कांग्रेस सरकार बना गई और भाजपा रह गई। इस बार सरकार एंटीइनकमबेंसी का सामना कर रही है, कांग्रेस के पक्ष में भी खास माहौल नहीं है और थर्ड फ्रंट भी चुनौती देता नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार कम मार्जिन वाली सीटों की तादाद बहुत ज्यादा रहने वाली है। 

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