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जयपुर. राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने राजस्थान से पूर्व मंत्री राजेंद्र गहलोत को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 26 मार्च को चुनाव होने हैं। बहुमत के लिहाज से इनमें से दो सीटें कांग्रेस और एक सीट भाजपा के खाते में जानी तय मानी जा रही है। राजस्थान भाजपा से राज्यसभा टिकट के लिए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व विधायक जसवंत विश्नोई, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रभुलाल सैनी, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी और पूर्व सांसद सीआर चौधरी के नाम भी कोर कमेटी की चर्चा में आए थे, लेकिन इन सब पर तरजीह देते हुए कमेटी ने लो प्रोफाइल गहलोत के नाम को आगे बढ़ाया।
गहलोत भाजपा की भैरोंसिंह सरकार में जलमंत्री रह चुके हैं वहीं 2015 में उन्होंने जोधपुर में पार्षद का चुनाव भी लड़ा। राज्यसभा चुनावों की अधिसूचना जारी होने बाद से प्रदेश में टिकट की दावेदारी को लेकर कई नेताओं ने दिल्ली की दौड़ भी लगाई। गहलोत को राज्यसभा प्रत्याशी चुने जाने के पीछे दो बड़ी वजह हैं। संघ बैकग्राउंड से आने वाले गहलोत लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं।
भाजपा के राजेंद्र गहलाेत का 45 साल का राजनीतिक सफर
निगम पार्षद और पूर्व मंत्री राजेंद्र गहलोत को भाजपा ने इस बार राज्यसभा का टिकट थमाया है। हालांकि वर्तमान राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया सहित भाजपा के पांच दिग्गज नेता इस दौड़ में थे, लेकिन पंचारिया का लोकल स्तर पर विरोध आैर केंद्रीय नेतृत्व के राजस्थान से आेबीसी वर्ग के नेता को टिकट देने की मंशा के चलते पैनल में पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी आैर राजेंद्र गहलोत रह गए। प्रदेश स्तर से सैनी की दावेदारी को मजबूत माना जा रहा था, लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने राजेंद्र गहलोत के नाम पर सहमति दे दी, इसके बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा आैर गहलोत को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। भाजपा के दिग्गज नेता भैरोंसिंह शेखावत के मंत्रिमंडल में मंत्री रह चुके गहलोत को वर्ष 2014 में जोधपुर नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए बतौर महापौर चुनाव लड़ने को कहा तो उन्होंने यह भी चुनौती स्वीकार की। हालांकि बाद में पार्टी ने महापौर नहीं बनाया, लेकिन गहलोत पांच साल तक निरंतर बोर्ड में अपनी सार्थक भूमिका निभाते हुए शहर के ज्वलंत मुद्दों को उठाया।
संघ व एबीवीपी में भी सक्रिय रहे
आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहने वाले गहलोत का राजनीतिक सफर काफी लंबा है। वर्ष 1977 में सोजत विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव लड़ा। वे 1980 से 86 तक भाजयुमो के पहले प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह व कलराज मिश्र के नेतृत्व में काम किया। इसके बाद युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने। सन् 1987-88 में प्रदेश मंत्री बने। वर्ष 1990 में कांग्रेस के दिग्गज नेता मानसिंह देवड़ा के सामने सरदारपुरा से विधायक चुनाव जीता आैर 1994 से 1998 तक भैरोंसिंह शेखावत मंत्रिमंडल में पीएचईडी मंत्री रहे। इसके बाद आेबीसी के प्रदेशाध्यक्ष पद का कामकाज भी किया। 2006 में वसुंधरा राजे सरकार ने जोधपुर नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा। तब उन्होंने जोधपुर में साढ़े छह किमी लंबा गौरवपथ बनाया था। 2008 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव लड़ा, हालांकि जीत नहीं पाए, लेकिन गहलोत को गृहनगर में घेरने में भाजपा कामयाब रही। फिलहाल भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष है।
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