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राजस्थान में भी दिलचस्प होगा राज्यसभा चुनाव; भाजपा ने दो उम्मीदवार उतारकर रोचक किया मुकाबला

5 महीने पहले
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ओंकार सिंह लखावत। फाइल फोटो
  • डूडी को राज्यसभा प्रत्याशी बनाना चाहती थी भाजपा, बड़े नेता के मनाने पर ऑफर ठुकराया
  • संख्या बल के हिसाब से दो सीटें कांग्रेस को और एक सीट भाजपा को मिलना तय
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जयपुर. मध्य प्रदेश, गुजरात के सियासी संकट के बीच 26 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव राजस्थान में भी दिलचस्प मोड़ ले सकते हैं। हालांकि संख्या बल के हिसाब से दो सीटें कांग्रेस को और एक सीट भाजपा को मिलना तय है, लेकिन भाजपा ने एक और उम्मीदवार पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत को उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। राज्य की राज्यसभा सीटों का गणित स्पष्ट है। दो सीटों पर कांग्रेस ने केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने राजेंद्र गहलोत को उतारा है। कांग्रेस को दो और भाजपा को एक सीट मिलना तय है। एक सीट जीतने के बाद भाजपा के पास 24 वोट बच जाते हैं, भाजपा ने इन्हीं वोटों में कांग्रेस को उलझा दिया है। 

लखावत को दूसरा उम्मीदवार बना दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को यह ऑफर दिया था कि वे अगर चुनाव में खड़े होते हैं तो उनके बचे हुए वोट पार्टी उनको शिफ्ट कर देगी। डूडी तैयार भी हो गए थे, लेकिन कांग्रेस के एक बड़े नेता के कहने पर उन्होंने भाजपा के ऑफर को ठुकरा दिया है। यह सियासी पासा भाजपा ने कांग्रेस के भीतर उथल-पुथल मचाने के लिए फेंका था। भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियां और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बीच डूडी के बीच एक मीटिंग भी हुई थी। भाजपा चाहती थी कि कांग्रेस से नाराज चल रहे डूडी को कांग्रेस के खिलाफ ही खड़ा कर दिया जाए।

चुनाव की दिल्ली से निगरानी कर रहे आलाकमान
राज्यसभा की पूरी निगरानी आलाकमान दिल्ली से कर रहा है। एक खास रणनीति के तहत चार दिनों से प्रदेशाध्यक्ष पूनियां और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ दिल्ली में जमे रहे। गुरुवार को दोनों नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बातचीत की है। जयपुर से दिल्ली पहुंचे भाजपा नेताओं ने शाह से दो दिन पहले दलील रखी थी कि नंबर कम हैं, ऐसी स्थिति में क्या लखावत का मैदान में ठिके रहना उचित होगा। शाह ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। ऐसा नहीं है कि सिर्फ कांग्रेस के भीतर उथल-पुथल मची है। लखावत को दूसरा उम्मीदवार बनाकर भाजपा के भीतर भी सियासत गर्म है।

संघ के भी पसंदीदा हैं गहलोत
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां, संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ वाली कमेटी ने राज्यसभा की एक सीट के लिए पूर्व मंत्री राजेंद्र गहलोत का नाम तय कर दिया था। गहलोत संघ के भी पसंदीदा है। कुछ नेता चाहते थे कि गहलोत के बजाय ओंकार सिंह लखावत को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाए। हालांकि फैसला गहलोत के पक्ष में आया, लेेकिन विरोध बढ़ते देख लखावत को दूसरा उम्मीदवार बना दिया। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को दो और भाजपा को एक सीट मिलेगी। लखावत की हार इसलिए लगभग तय है, क्योंकि राज्यसभा चुनाव में पार्टी पर्यवेक्षक को वोट दिखाकर डालना होता है। ऐसे में कांग्रेस के किसी भी असंतुष्ट विधायक की पाला बदलने की संभावना नहीं है। मध्य प्रदेश जैसा विरोध भी राजस्थान में नहीं है। 

यह है राज्यसभा की सीटों का गणित : भाजपा ने खेला पहला राजनीतिक दांव
राज्यसभा में चार प्रत्याशियों के मैदान में होने से जीत के लिए एक प्रत्याशी को 51 वोट चाहिए। संख्या बल के अनुसार कांग्रेस के पास अपने विधायकों की संख्या 107 है। इसके अलावा कुछ निर्दलीय और अन्य दलों के विधायकों का भी समर्थन है। ऐसे में दो सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी आसानी से जीत दर्ज कर लेंगे। भाजपा एक सीट पर आसानी से जीत दर्ज कर लेगी, लेकिन दूसरी सीट के लिए भाजपा के पास केवल 24 वोट ही बचे हैं। ऐसे में भाजपा कांग्रेस कैंप में सेंधमारी कर 27 वोटों का इंतजाम करने के प्रयास में है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर ऐसा संभव नहीं है। माना जा रहा था कि डूडी के लिए निर्दलीय विधायक सुरेश टांक, ओम प्रकाश हुडला और कांति मीणा भी वाेट देने पर सहमत थे। ऐसे में डूडी के पक्ष में विधायकों की संख्या 27 पहुंच रही थी। जीतने के लिए 51 वोट चाहिए। डूडी 24 विधायकों को अपने पक्ष में कर लेते तो जीत तय थी। प्रदेश में कुल 200 वोट हैं।

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