राजस्थान / सही होंगे अस्पतालों के वार्ड और थियेटर, एसएमएस की खबर प्रकाशित होने पर मंत्री ने दिए निर्देश



3डीई वार्ड में बेड पर गिरा मलबा। 3डीई वार्ड में बेड पर गिरा मलबा।
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3डीई वार्ड में बेड पर गिरा मलबा।3डीई वार्ड में बेड पर गिरा मलबा।

  • 80 साल पुनाने एसएमएस में प्लास्टर झड़ रहा है

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 03:33 PM IST

जयपुर। एसएमएस अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, कॉटेज की "हालत" सही की जाएगी। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि एसएमएस अस्पताल के अलावा अन्य सभी अस्पतालों में भी झड़ते प्लास्टर और अन्य व्यवस्थाओं को तुरंत सही किया जाए।

 

गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने 12 जुलाई को ही इस संदर्भ में मामला उजागर किया था और बताया था कि राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में किस तरह झड़ते प्लास्टर से मरीज और डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ की जान सांसत में है। इसके बाद शुक्रवार सुबह ही चिकित्सा मंत्री ने इस सम्बद्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

 

उन्होंने प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा शिक्षा को मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों की मरम्मत पर विशेष ध्यान देकर भर्ती मरीजों की सुरक्षा की पुख्ता करने और अस्पताल परिसर में किसी भवन के क्षतिग्रस्त होने पर संबंधित क्षेत्र से मरीजों को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित करने की भी व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। साथ ही आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर सभी अस्पतालों की साफ सफाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

एसएमएस अस्पताल भवन काफी पुराना होने और समय पर सही मरम्मत नहीं होने से हजारों मरीजों, स्टाफ की जान सांसत में है। पिछले कुछ समय से अस्पताल के विभिन्न वार्डों, ऑपरेशन थियेटर और अन्य जगहों से प्लास्टर गिर रहा है लेकिन ना तो अस्पताल की मरम्मत हो रही है और ना ही इस ओर कोई ठोस कदम उठाया गया है। वहीं बारिश में यह खतरा और भी अधिक बना हुआ है। हाल ही में बार-बार गिरते प्लास्टर से परेशान होकर मरीजों को गैलेरी में शिफ्ट किया गया है। 

 

यहां बदहाली ज्यादा 
 

इमरजेंसी ओटी, 2एबी, 3एबी, 2एफ, 2डीई, 3एफ, 3सी, 3डीई, 3जी, 3एच, न्यूरोसर्जरी के टॉयलेट-चैम्बर, मेडिकल ज्यूरिस्ट विभाग, बांगड परिसर में दवा वितरण काउंटर, कॉटेज वार्डों में लगभग हर दिन प्लास्टर गिर रहा है। हालात ये कि बारिश आने पर 3एफ वार्ड में तो इतना पानी टपकता है कि मरीजों को बाहर निकालना पड़ता है। 

 

मरीज किए शिफ्ट 
 

3डीई वार्ड में डॉक्टर पर प्लास्टर आकर गिरा। स्टाफ ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दी। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर्स ने जांच कर वार्ड की हालत पर चिंता जताई। इसके बाद मरीजों को यहां से गैलेरी और दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया गया। 

3डीई वार्ड के बेडों पर मलबा गिरा 

 

80 साल पुराना, 25000 हजार लोग हर समय अस्पताल में रहते हैं
 

एमएनआईटी की रिपोर्ट- एसएमएस अस्पताल का भवन 80 साल पुराना हो चुका है। यहां 4500 मरीज तो हर समय भर्ती रहते हैं। एक मरीज के साथ औसतन तीन लोग होते हैं। यानी कि 13000 हजार मरीज तो हर समय रहते हैं। ओपीडी के समय 10000 हजार मरीज और परिजन होते हैं। स्टाफ मिलाकर हर दिन 25000 हजार लोग हर समय अस्पताल में रहते हैं। बिल्डिंग का हिस्सा जरा भी दरका तो दुर्घटना तय है। बिजली फिटिंग भी पुरानी है। भवन में आए दिन शॉर्ट सर्किट हो रहे हैं। चार रुपए तक मेंटेनेंस फंड घटाकर सवा करोड़ रुपए कर दिया गया। नतीजा, जिम्मेदारों ने काम करना बंद कर दिया।

 

पीडब्ल्यूडी से काम कराने को कहा

कई जगह से चूना गिरा था। पीडब्ल्यूडी को जानकारी दी और काम जल्दी कराने को कहा था। पूरी मेंटीनेंस के लिए काफी पैसा चाहिए, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि सभी काम आसानी से हो जाएं। -डॉ. डीएस मीणा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल 

 

न्यूज व फोटो : संदीप शर्मा

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