जयपुर

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कर्नल बैंसला ने कहा- गुर्जरों को आरक्षण नहीं मिला तो होगा आंदोलन

छह मई को गुर्जर-रेबारी व बंजारा समाज के नेताओं की पीलूपुरा में पंचायत, तय होगी आंदोलन की रूपरेखा

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 01:10 AM IST
कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पत्र कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला पत्र

हिंडौन सिटी/जयपुर. गुर्जरों को एसबीसी के 5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिलने से नाराज गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने एक बार फिर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। बुधवार को वर्धमाननगर स्थित आवास पर कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने संघर्ष समिति से जुडे़ गुर्जर नेताओं की बैठक ली और पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।


- पत्रकार वार्ता में वसुंधरा सरकार पर बरसते हुए कर्नल बैंसला ने कहा कि गुर्जर समाज ने सरकार को हमेशा से सपोर्ट किया है, लेकिन हर बार गुर्जरों के साथ वादा खिलाफी की गई। इसे अब सहन नहीं किया जाएगा। ओबीसी का वर्गीकरण (विभाजन) कर 50 प्रतिशत के अंदर गुर्जर, रेबारी और बंजारा समाज को आरक्षण नहीं मिला तो 21 मई से पहले आंदोलन किया जाएगा। यह आंदोलन ऐतिहासिक होगा और प्रदेशभर में एक साथ किया जाएगा। हालांकि बैसला ने कहा कि आंदोलन शांतिप्रिय होगा, लेकिन सरकार ने नहीं सुनी तो रेलवे एवं सड़क मार्ग जाम करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।

- आंदोलन की तारीख तय करने एवं रूपरेखा बनाने के लिए 6 मई को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति से जुड़े पदाधिकारी, गुर्जर नेताओं, रेवारी व बंजारा समाज के नेताओं की एक पंचायत पीलूपुरा में होगी।

बैंसला ने कहा- हम नहीं जाएंगे सरकार से वार्ता करने

- सरकार से वार्ता का न्योता मिलने के सवाल पर कहा कि वे सरकार के पास वार्ता नहीं करने जाएंगे, सरकार को आना है तो वे उनके पास आ सकती हैं। आंदोलन में अधिकाधिक संख्या में युवाओं को जोड़ा जाएगा।

मंत्री से मिलने वाला गुर्जर नेता होगा संघर्ष समिति से बर्खास्त
- बैंसला ने कहा कि जब तक गुर्जर आरक्षण का मुद्दा हल नहीं होता है, तब तक गुर्जर समाज का कोई भी नेता किसी भी मंत्री से नहीं मिले और कोई मिलेगा तो उसे तत्काल गुर्जर संघर्ष समिति से बर्खास्त कर दिया जाएगा।

यह है मामला

- पांच प्रतिशत एसबीसी आरक्षण तीन बार हाईकोर्ट द्वारा खत्म किए जाने के बाद राज्य सरकार चौथी बार एसबीसी आरक्षण का विधेयक लाई थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने 9 नवंबर 2017 के अंतरिम आदेश से आरक्षण बिल-2017 की क्रियान्विति पर रोक लगा दी थी और राज्य सरकार को पाबंद किया था कि वह इस विधेयक के तहत कोई कार्य नहीं करे।

- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दे सकती। राज्य सरकार ने पूर्व में 2015 में भी आरक्षण कानून-2015 के तहत प्रदेश में आरक्षण बढ़ाकर 54 प्रतिशत किया था। हाईकोर्ट ने इस आरक्षण अधिनियम को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जाए।

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