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सरकार-बीमा कंपनियों की धांधली से किसानों को करोड़ों का नुकसान; कैग की रिपोर्ट में खुलासा

बीमा कंपनियों ने एरिया करेक्शन फैक्टर के आधार पर बीमित क्षेत्रफल कम किया, इससे किसानों को प्रीमियम कम मिल पाया

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 06:35 AM IST
Revealed in CAG report losses to farmers by rigging of government insurance companies

जयपुर. किसानों को जोखिम से बचाने के लिए लाई गई फसल बीमा योजना में बीमा कंपनियों को फायदा और किसानों को हर स्तर पर नुकसान ही उठाना पड़ा। पिछले सप्ताह विधानसभा में टेबल की गई कैग की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीसीआईएस) और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस) में बीमा कंपनियों के चयन से लेकर फसल खराबी पर किसानों को बीमा राशि के भुगतान में लगभग 50 करोड़ रुपए की धांधली हुई।

गौरतलब है कि योजना में प्रावधान था कि न्यूनतम प्रीमियम का प्रस्ताव देने वाली कंपनी का चयन ही किया जाएगा। लेकिन कृषि विभाग द्वारा गलत प्रक्रिया से बीमा कंपनियों का चयन किया। जिन कंपनियों का चयन किया गया उनके लिए निर्धारित प्रीमियम की राशि उन जिलों के बुआई क्षेत्रफल से भी ज्यादा था। इसी प्रकार एमएनएआईएस में पाली में बीमा कंपनी का चयन में गड़बड़ी के चलते एक लाख 17 हजार किसानों को डेढ़ करोड़ रुपए के दावे कम मिले।

बीमा कंपनियों ने पहुंचाया 31 करोड़ का नुकसान : केंद्र सरकार की राष्ट्रीय फसल बीमा योजना (एनसीआईपी) में भी किसानों को 31 करोड़ रुपए बीमा क्लेम कम मिले क्योंकि बीमा कंपनियों ने बीमा के लिए तय किए गए बुआई क्षेत्रफल को 2 लाख 27 हजार हैक्टेयर तक घटा दिया। योजना में प्रावधान था कि यदि किसी जिले में बीमित क्षेत्रफल वहां के फसल बुआई क्षेत्रफल से ज्यादा रहता है तो राज्य सरकार की सहमति से एरिया करेक्शन फैक्टर का उपयोग कर इन्हें संशोधित किया जा सकेगा। लेकिन राज्य सरकार ने इन कंपनियों के पक्ष में इस शर्त पर अधिसूचना जारी की कि किसानों के दावों का निपटारा गिरदावरी की रिपोर्ट के आधार पर होगा। लेकिन बीमा कंपनियों ने एरिया करेक्शन फैक्टर के आधार पर बीमित क्षेत्रफल कम कर दिया। इससे किसानों को 31 करोड़ रुपए का प्रीमियम कम मिला।

गलती बैंक की, खामियाजा किसानों ने भुगतान : सीएजी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फसल खराबे को लेकर 7485 लघु एवं सीमांत किसानों को सिर्फ इसलिए मुआवजा नहीं मिल पाया क्योंकि एसबीआई बैंक द्वारा बीमा कंपनी को समय पर प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया। हालांकि राज्य सरकार की ओर से सीएजी को भेजे जवाब में कहा गया कि इस नुकसान की भरपाई करने के लिए उसने बैंक को निर्देश दिए हैं।

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