इंटरव्यू / सबसे कम उम्र में जज बनने वाले मयंक ने कहा- न कभी कोचिंग की और न कभी फेसबुक देखा

RJS topped for the first time in 5 years only from college education, never seen coaching nor Facebook
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  • 5 साल सिर्फ कॉलेज की पढ़ाई से पहली बार में टॉप किया राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा
  • 21 साल की उम्र में मयंक ने न्यायिक अधिकारी बनकर देश में बनाया कीर्तिमान
  • मयंक रोजाना 6 से 8 घंटे और वक्त मिलने पर कभी-कभी 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की

विष्णु शर्मा

Nov 30, 2019, 03:45 PM IST

जयपुर. राजस्थान न्यायिक सेवा (आरजेएस-2018) में जयपुर के मयंक प्रताप सिंह ने टॉप किया है। 21 साल की उम्र में मयंक ने न्यायिक अधिकारी बनकर देश में कीर्तिमान बनाया है। मयंक ने राजस्थान यूनिवर्सिटी में फाइव ईयर लॉ के अंतिम वर्ष में पढ़ाई के साथ ही यह परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉप किया। 

खास बात यह है कि आरजेएस की तैयारी के लिए मयंक ने कोई कोचिंग नहीं की। वे सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूर रहे। उनका फेसबुक अकाउंट तक नहीं है। दैनिक भास्कर मोबाइल एप ने मयंक से बातचीत की। उसकी खास बातें-

सवाल: आपको कितनी उम्मीद थी सेलेक्शन और टॉप करने की?
मयंक: सेलेक्शन की पूरी उम्मीद थी। टॉप करने की नहीं। इसलिए आज मैं और परिवार बहुत खुश है।

सवाल: आपने आरजेएस की तैयारी कैसे की?

मयंक: परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम उम्र पहले 23 साल थी, जिसे इसी साल घटाकर 21 किया गया। ऐसे में मेरे पास कम वक्त था। जब आरजेएस परीक्षा में उम्र सीमा कम होने का नोटिफिकेशन आया तो मुझे पता चला कि मैं एग्जाम दे सकता हूं। इसके पहले परीक्षा के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 23 वर्ष थी। इसलिए मैंने कोई कोचिंग भी नहीं की। मैंने सेल्फ स्टडी शुरू की। जो कॉलेज में पढ़ा। उसे रिवाइज किया। इसमें कॉलेज की पढ़ाई ही काम आई। मैंने परीक्षा में कोर्स से जुड़े विषयों को कॉलेज में ही अच्छे से पढ़ा था। शायद इसलिए मैं पहली रैंक हासिल कर सका। क्योंकि, मैंने कॉलेज में अच्छे से पढ़ाई की।

सवाल: आपने कितने घंटे पढ़ाई की?
मयंक:  रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे पढ़ाई करता था। लेकिन जरुरत पढ़ने पर 10 से 12 घंटे भी पढ़ना पढ़ा। इसी से मैं एग्जाम सिलेबस को पूरा कर सका।

सवाल: पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया को छोड़ा या एक्टिव रहे?

मयंक: मैंने कभी अपनी लाइफ में फेसबुक पर अकाउंट नहीं बनाया। बाकी जिन सोशल मीडिया पर एक्टिव था। उन्हें भी एग्जाम की तैयारी के दौरान डि-एक्टिवेट कर दिया। सिर्फ इंटरनेट से उतना ही वास्ता रखा कि जितनी मुझे लीगल अपडेट मिल जाए। सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के कोई अहम जजमेंट की अपडेट मिल जाए। इनके बारे में पढ़ने का मिल जाए। सिर्फ इतना ही ध्यान रखा।

सवाल: दोस्तों ने कभी नहीं टोका क्या कि तुम सोशल मीडिया पर क्यों नहीं हो ?
मयंक: बिल्कुल, कई बार दोस्त टोकते थे कि तुम सोशल मीडिया पर क्यों नहीं हो। फेसबुक, व्हाट्सएप क्यों यूज नहीं करते। लेकिन समय के साथ वो भी मुझे जान गए कि मेरी आदत क्या है।

सवाल: सोशल गेदरिंग (सामाजिक मेल मिलाप) से भी दूर रहे क्या?

मयंक: जी, सोशल गेदरिंग के बारे में मुझे लगता है कि मैंने कम से कम करके रखा। जहां बहुत जरूरी होता था। सिर्फ उन्हीं परिवारिक कार्यक्रमों में जाता था। वरना इनसे दूर रहा ताकि मैं मेरे लक्ष्य पर फोकस कर सकूं।

सवाल: इंटरव्यू के दौरान आपसे कौन से प्रश्न पूछे गए? 
मयंक: इंटरव्यू पैनल में मौजूद जजों और एक्सपर्टस ने मुझसे कन्वेंशनल लॉज के बारे में पूछा। कोर्ट में होने वाली प्रैक्टिस, प्रोटोकॉल के बारे में पूछा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए सबरीमाला जैसे अन्य महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में पूछा। मेरा फीडबैक अच्छा था।

सवाल: न्यायिक सेवा ही क्यों?
मयंक: जब मैं लॉ कर रहा था। तब सोचा कि ज्यूडिशियरी का बहुत बड़ा रोल है। जब लोग केस लेकर आते है। उन्हें न्याय की जरूरत होती है। उनका विश्वास ज्यूडिशियरी में बहुत है। तब मुझे लगा कि मैं इस सेवा में जाकर अपना योगदान दूं। इसलिए मेरा फोकस और झुकाव न्यायिक सेवा पर था।

सवाल: तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मूलमंत्र?

मयंक: आपकी उम्र कुछ भी हो। कम हो या ज्यादा। आप कहीं भी हों। कॉलेज में हो या पास आउट हो गए हों। आप किसी भी स्टेज पर हो। लेकिन मेहनत का कोई शॉर्ट कट नहीं है। आप मेहनत और लगन से पढ़ाई करें। सिर्फ एग्जाम यही मांगता है कि कंस्ट्रेशन (एकाग्रता) हो, डेडिकेशन (समर्पण) हो और मोटिवेशन (प्रेरणा) बनी रहे। इन तीनों बातों के मिश्रण से मुझे लगता है कि यही सफलता का मूलमंत्र है।

मयंक के पिता ने कहा- बचपन से है टॉपर 
मयंक के पिता राजकुमार सिंह राजकीय स्कूल में प्राचार्य हैं। वह कहते हैं कि मयंक बचपन से टॉपर रहा है। कभी पढ़ाई के लिए कहने की जरूरत नहीं पड़ीं। मूलरूप से मयंक राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले हैं। मयंक की मां भी राजकीय स्कूल में शिक्षक हैं।

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