जयपुर / सोनाेग्राफी में 9वें महीने तक जुड़वां दिखे, मगर डिलीवरी के बाद एक ही बच्चा दिया, हंगामा



हंगामा करते परिजन। हंगामा करते परिजन।
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हंगामा करते परिजन।हंगामा करते परिजन।

  • पीड़ित का कहना- बच्चा नहीं हुआ तो कहां गया  पुलिस कहती है, लेने के देने पड़ जाएंगे
  • अस्पताल का जवाब- सिजेरियन के दौरान दूसरा बच्चा था ही नहीं, ये कैसे हुआ पता नहीं

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 01:41 AM IST

जयपुर. सोनोग्राफी में जुड़वां बच्चे और डिलीवरी हुई एक ही बच्चे की। दूसरा बच्चा कहां गया? इसे ना तो डॉक्टर बता पा रहे हैं और ना ही अस्पताल प्रशासन। यह अजब वाकया हुआ – चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल में। मामले को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया और दूसरे बच्चे की मांग करने लगे।

 

चार घंटे से अधिक समय तक चले हंगामे के दौरान पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन मामला इतना बढ़ा कि वह भी परिजनों को शांत नहीं करा सकी। मामले में परिजनों ने अस्पताल लिखित शिकायत दी है। इसमें लिखा गया है कि अस्पताल ने पहले जुड़वां बच्चों की बात कही थी और एक ही हुआ है तो स्टाफ ने बेतुका बयान दिया- हो सकता है कि बच्चे आपस में झगड़ लिए होंगे इसलिए एक मर गया। वहीं अस्पताल प्रशासन भी हतप्रभ है कि आखिर ऐसा कैसे हुआ?

 

जिस डॉक्टर ने सोनाेग्राफी की थी, उसने कहा- जुड़वां बच्चे दिखे थे: 9 जुलाई को जनाना अस्पताल में जयपुर के हाथोज निवासी रमादेवी भर्ती हुईं। यहां डॉ. सयुंता गुप्ता ने सोनोग्राफी की। जुड़वां बच्चे बताए। 10 जुलाई को डॉ. अनिल गुर्जर ने सिजेरियन डिलीवरी कराई और परिजनों को बच्चा सौंप दिया। परिजनों ने कहा-एक ही बच्चा क्यों, जुड़वां बताए थे, तो डॉक्टर्स ने कहा कि एक ही हुआ है। दूसरा था ही नहीं।

 

3 दिन बाद बढ़ा मामला, परिजन बोले-हमें अपना दूसरा बच्चा चाहिए: शनिवार को रमादेवी के कई परिजन आए और न्होंने अस्पताल प्रशासन से रिकॉर्ड मांगा। लेकिन प्रशासन ने मना कर दिया। कहा कि डिस्चार्ज के समय ही दस्तावेज दे सकते हैं। बात बढ़ी, परिजनों ने कहा-उन्हें दूसरा बच्चा चाहिए। यदि बच्चा नहीं हुआ तो वह कहां गया। परिजनों ने कहा कि वे एफआईआर कराएंगे। लेकिन कोई भी दस्तावेज नहीं होने से केस नहीं करा पाए।

 

कब-कब हुई सोनोग्राफी
{जनाना अस्पताल में फरवरी (गर्भ का पाँचवा महीना) में एक ही बच्चा दिखा।  
{इसी अस्पताल में 18 जून को हुई सोनोग्राफी में जुड़वां बच्चे दिखे।  
{जून में ही निजी अस्पताल में कराई गई सोनाेग्राफी जांच में भी जुड़वां बच्चे होने की ही रिपोर्ट दी गई।

 

बड़ा सवाल, आखिर ऐसा कैसे हो सकता है?

खुद जनाना अस्पताल प्रशासन मान रहा है कि सोनोग्राफी में दो ही बच्चे हैं। लेकिन सर्जरी में एक ही बच्चा कैसे आया? इस मामले में सर्जन डॉ. अनिल और सोनोलॉजिस्ट डॉ. सयंुता गुप्ता से भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

 

पेशेंट की ननद तारा देवी ने लिखित शिकायत में कहा- पूछने पर स्टाफ बोला - बच्चों का पेट में झगड़ा हो गया, इसलिए एक मर गया 
मैं तारा देवी रामा देवी (पेशेंट) की ननद हूं। मेरी भाभी रामा देवी पत्नी लाल राम को 9 जुलाई को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती से पहले निजी अस्पताल में सोनोग्राफी कराई गई जिसमें दो बच्चे होने की बात पुष्टि की गई। 10 को ऑपरेशन से डिलीवरी कराई गई, उसमें एक ही बच्चा दिया। पूछने पर बताया कि एक ही बच्चा हुआ है। बार-बार पूछने पर धमकाया गया। बोला कि अगर बच्चे की सलामती चाहती हो तो चुप रहो। दो ही बच्चे थे पर दोनों बच्चों में पेट में ही झगड़ा हो गया, इसलिए एक मर गया। हमने गटर में फेंक दिया, जो करना है कर लो

(शब्दश: जो शिकायत में लिखा गया)

 

^सोनोग्राफी में दो ही बच्चे बताए गए हैं। लेकिन सीजेरियन के दौरान एक ही बच्चा होना सामने आया है। ऐसा कैसे हुआ, समझ के परे है। लेकिन हमने पूरे मामले की जानकारी 10 जुलाई को ही परिजनों को दे दी थी और उन्होंने बात भी मान ली थी। आज यह मामला कैसे उठा, कुछ नहीं पता। इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। -डॉ. लता राजोरिया, अधीक्षक, जनाना अस्पताल।

 

हमारी कोई सुन ही नहीं रहा। हमें दो बच्चे बताए गए थे और एक ही दिया है। हमने शिकायत की तो डांट कर भगा दिया। हमें हमारा दूसरा बच्चा चाहिए। पुलिस वाले कह रहे हैं कि यहां हंगामा मत करो। लेने के देने पड़ जाएंगे। -लाल राम, महिला का पति।

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