पुष्कर मेला / छह फीट लंबी रोबीली मूंछों के दम पर 11 साल से अव्वल आ रहा है रामसिंह, पेशे से है कम्पाउंडर



रोबीली मूंछों के दम पर फिर विजेता रामसिंह राजपुरोहित रोबीली मूंछों के दम पर फिर विजेता रामसिंह राजपुरोहित
Six feet long mustache brought fame to Ram Singh in pushkar mela ajmer rajasthan
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रोबीली मूंछों के दम पर फिर विजेता रामसिंह राजपुरोहितरोबीली मूंछों के दम पर फिर विजेता रामसिंह राजपुरोहित
Six feet long mustache brought fame to Ram Singh in pushkar mela ajmer rajasthan
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  • पुष्कर मेले में आयोजित हुई सांस्कृतिक व खेलकूद प्रतियोगिता
  • मूंछ प्रतियोगिता में 9 देसी व 2 विदेशी पर्यटकों ने लिया हिस्सा

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 06:04 PM IST

अजमेर. शहर में चल रहे पुष्कर पशु मेले के दौरान शुक्रवार को मूंछ प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें दो विदेशी पर्यटकों व 9 देशी प्रतिभागियों में हिस्सा लिया। जिसमें मारवाड़ के रहने वाले रामसिंह राजपुरोहित ने अपनी छह फीट लंबी रौबीलीं मूंछों के दम पर 11 वीं बार मूछंदरों के मैदान में बाजी जारी है। वे मूंछ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले 11 प्रतियोगियों में पहले स्थान पर रहे। दूसरे स्थान पर रहे शाहपुरा निवासी ईशाक खान व चांद खान तथा तीसरे स्थान पर रहे जाटिया निवासी शंकर सिंह व रतन सिंह रावत।  

 

पाली जिले के गांव मेला वास के रहने वाले रामसिंह राजपुरोहित सोजत रोड पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रथम श्रेणी कम्पाउंडर है। भजन गाने शौक रखने वाले रामसिंह ऐसे शख्स है जिन्होंने अपनी रौबीलीं मूंछों की बदौलत ना केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत में अपनी पहचान बनाई है।

 

150 से ज्यादा प्रतियोगितों में लिया हिस्सा, 33 अवार्ड जीते

रामसिंह राजपुरोहित राजस्थान पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित करीब 150 सांस्कृतिक प्रतियोगितों में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले चुके है। जिसमें अपनी मूंछों और पगड़ी बंधन व राजस्थानी वेषभूषा की बदौलत करीब 33 अवार्ड जीत चुके है।

 

मूंछों की बदौलत जीते 16 अवार्ड, पुष्कर मेले में 11 साल से अव्वल

रामसिंह ने अकेले 16 अवार्ड छह फीट लंबी आकर्षक मूंछों की वजह से जीते है। वहीं, पुष्कर मेले में रामसिंह ने वर्ष 2009 से मूंछ प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरु किया था। जिसमें पिछले 11 वर्षों से वह प्रथम स्थान प्राप्त करते आए है। रामसिंह ने बताया कि करीब 15 साल पहले कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही मन हुआ कि वे कुछ अलग करें।जिससे उनका नाम हो। पहचान बनें। तब मूंछ रखनें की ठानीं।  

 

लोगों ने मजाक बनाया, कमेंट्स किए लेकिन हार नहीं मानी

इसे बढ़ाने के लिए प्रयासों में जुट गए। मूंछ बढ़ाने का ऐसा शौक लगा कि वे एक बाल भी नहीं टूटने देते। शुरूआत में मूंछें बढ़ाने पर उनकी मजाक बनने लगी। जान पहचान के लोग कई तरह की बातें करने लगे। लेकिन वे अपने लक्ष्य से भटके नहीं। खुद को कमजोर महसूस नहीं किया और आज इन्हीं मूंछों की बदौलत उनकी देश विदेश में खासी पहचान है।

 

गिनीज बुक में नाम आना है सपना

अगर कई बार प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए रामसिंह को ड्यूटी से छुट्‌टी भी लेनी पड़ती है। जिसमें उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। रामसिंह राजपुरोहित ने लंबी मूंछों में वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले करणाराम भील को अपना आदर्श बताया। वे चाहते है कि उनका नाम भी लिम्का बुक रिकार्ड और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हों।

 

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