योजना / प्रदेश की 50 हजार से ज्यादा सरकारी बिल्डिंगाें की छत पर लगेंगे सोलर प्लांट



Solar plants will be installed on roof of government buildings
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Solar plants will be installed on roof of government buildings

  • बिजली ग्रिड से जोड़े जाएंगे प्लांट, आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाएगी इलेक्ट्रिसिटी
  • इस योजना से दूरदराज के इलाकों में बिजली गुल हाेने की समस्या से राहत मिलेगी

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 12:33 AM IST

जयपुर (श्याम राज शर्मा). प्रदेश के सभी सरकारी विभागाें की 50 हजार से अधिक बिल्डिंगाें और परिसरों में सोलर प्लांट लगाएं जाएंगे। ये प्लांट नेट मीटरिंग के जरिए बिजली ग्रिड से जोड़े जाएंगे। इससे जरिये बिजली काे आम उपभाेक्ताओं तक भी पहुंचाया जाएगा।

 

मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत विभागाें काे अपनी बिल्डिंग की जानकारी राजस्थान अक्षय ऊर्जा कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरआरईसी) को देने काे कहा गया है। आरआरईसी को ही सरकार ने क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया है। सोलर प्लांट लगाने के लिए प्राइवेट कंपनियों का पैनल बनेगा। बिड के जरिए बिजली की रेट तय होगी। इसमें सरकारी महकमों का कोई खर्चा नहीं होगा।

 

उधर, जयपुर डिस्कॉम प्रबंधन ने अपने बिल्डिंग इंचार्ज से 16 सितंबर तक प्रस्ताव मांग लिए हैं। आरआरईसी के प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव सिंह ने बताया है कि सभी सरकारी दफ्तर सुबह 9.30 से शाम 6 बजे तक खुलते हैं। ऐसे में ऐसे में सोलर प्लांट में बनने वाली बिजली का उपयोग किया जा सकेगा।

 

रिन्यूवबल एनर्जी सर्विस कंपनी (रेस्को) मोड में सरकारी विभाग की बिल्डिंग पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का काम प्राइवेट कंपनी करेगी। यह कंपनी ही प्लांट एवं सिस्टम का पूरा खर्च वहन करेगी। छत के बदले महकमे को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके बाद जो बिजली बचेगी, उसे नेट मीटरिंग के जरिए आम उपभोक्ताओं को बेची जाएगी।

 

प्राइवेट पार्टनर तय करने की जिम्मेदारी सरकार ने आरआरईसी को सौंपी है। इसके लिए कंपनियों से आवेदन मांगे जाएंगे। कम से कम रेट पर बिजली देने वाली कंपनियों को पार्टनर चुना जाएगा। फिर बिल्डिंग इंचार्ज व प्राइवेट पार्टनर के बीच 25 साल तक बिजली खरीदने का एमओयू होगा।

 

डिस्काॅम को भी दिन में ज्यादा मिलेगी बिजली 
सरकारी बिल्डिंगों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगने से डिस्कॉम को भी नेट मीटरिंग से दिन में ज्यादा बिजली मिलेगी। ऐसे में थर्मल प्लांट व ओपन एक्सेस से बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे प्रसारण सिस्टम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए की बचत हो सकेगी।

 

दूरदराज के इलाकों में बिजली गुल हाेने की समस्या से राहत मिलेगी
डिस्कॉम सरकारी विभागों को बिजली अघरेलू (एनडीएस) रेट पर सप्लाई करता है। यानि करीब 10 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली का बिल आता है। जो भारी भरकम होता है। इस योजना से बिल की बचत होगी। दूरदराज व ग्रामीण इलाकों के सरकारी विभागों व स्कूलों में भी बिजली सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

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