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जांच पर सवाल / एसपी ने पीएचक्यू के एडी.एसपी की जांच पर सवाल उठाए, साक्ष्यों की अनदेखी कर आरोप प्रमाणित माने



SP questions the investigation of PAQ AD. SSP
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SP questions the investigation of PAQ AD. SSP
  • एसपी ने मामले को झूठा माना तो एडीजी ने एफआर मंजूर कर दी

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 05:22 AM IST

ओमप्रकाश शर्मा, जयपुर. बिल्डर के खिलाफ दर्ज एक धोखाधड़ी के मामले में पुलिस मुख्यालय में तैनात एसपी ने क्राइम ब्रांच के एक एडिशनल एसपी की जांच और एडीपी की राय पर सवाल खड़े कर दिए। एसपी हेमंत शर्मा ने अपनी जांच में माना कि एडिशनल एसपी मिलन कुमार जोहिया और एडीपी ने बिना साक्ष्यों का अवलोकन किए बिना नहीं ही आरोप प्रमाणित मान लिए। जबकि पत्रावली में नए तथ्य सामने आ गए थे। एडीपी ने यह राय गलत दी है। एसपी की जांच रिपोर्ट के बाद एडीजी पीके सिंह ने मामले में एफआर मंजूर करके फाइल को जयपुर कमिश्नरेट भेज दिया। 


खास बात यह है कि इस मामले में तीन एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी अलग-अलग जांच में आरोप प्रमाणित मान चुके थे। लेकिन आरोपी पक्ष की सिफारिश पर गृहमंत्री व एडीजी क्राइम बार-बार अनुसंधान बदल देते थे। पांचवीं दफा जब एसपी हेमंत शर्मा को मामले की जांच सौंपी गई तो उन्होंने आरोप झूठे माने है।

 

अब सवाल यह है कि जब एडिशनल एसपी स्तर के पुलिसकर्मियों ने गलत जांच की और एडीपी ने गलत राय दी है तो क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। ऐसे में पुलिस मुख्यालय क्राइम ब्रांच की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो रहे है।

 

मामला बजाजनगर थाने का है। इस मामले में पहले आरोप प्रमाणित होने पर तत्कालीन एडीजी एएचटी ने एडिशनल डीसीपी ईस्ट को आरोपी मनीष केजरीवाल को गिरफ्तार करने के आदेश जारी किए थे। साथ ही फर्जी स्टांप विक्रेता के खिलाफ और अन्य की भूमिका की जांच कर कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। 
 

पहले एफआर, फिर प्रमाणित, अब पांचवीं दफा एफआर : सबसे पहले मुकदमा दर्ज होने के बाद बजाजनगर थाने के तत्कालीन एसएचओ चिरंजीलाल ने मामले की जांच की। उन्होंने मामले को झूठा मानकर एफआर लगा दी। इसके बाद कोर्ट ने मामले को रिओपन कर जांच के आदेश दिए। सीआईडी सीबी जयपुर रेंज सैल में तैनात एडिशनल एसपी विश्नाराम विश्नोई को जांच सौंपी गई। उन्होंने आरोप प्रमाणित मान लिए। इसी दौरान आरोपी पक्ष ने जांच बदला ली।

 

तीसरी बार सीआईडी सीबी एएचटी में तैनात एडिशनल एसपी राजेन्द्र प्रसाद को जांच दी गई। उन्होंने भी आरोप प्रमाणित मान लिए। आरोपी पक्ष ने फिर से जांच बदलवा ली। एडिशनल एसपी मिलन जोहिया ने भी जांच में आरोप प्रमाणित मान लिए। आरोपी पक्ष ने फिर से जांच बदला ली। पांचवीं दफा तफ्तीश एसपी हेमंत शर्मा ने की। उन्होंने जांच में माना कि मामला झूठा है।

 

यह है मामला : वर्ष 2014 में बजाजनगर थाने में जय अम्बे नगर टोंक रोड़ निवासी उषा सक्सेना ने आईकेरस बिल्डर्स एंड डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के मनीष केजरीवाल, उषा केजरीवाल, प्रमोद शर्मा, नाथूराम बैरवा व गंगराम के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। परिवादी का आरोप था कि आरोपियों ने वर्ष 2012 में उसके प्लाट का कोलाबरेशन एग्रीमेंट किया किया था, लेकिन बाद में एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन किया। 

 

मैं तफ्तीश नहीं करता। मैं सुपरवाइजर ऑफिसर हूं। क्राइम ब्रांच से संबंधित कोई बात करनी है तो एडीजी से ही बात करें। - हेमंत शर्मा, एसपी क्राइम ब्रांच, पुलिस मुख्यालय

मैं इस बारे में कुछ नहीं बोलूंगा। उच्च अधिकारियों से ही बात करें। - मिलन कुमार जोहिया, एएसपी

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