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छात्रसंघ चुनाव के नतीजे आज

राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव परिणाम मंगलवार को जारी होगा। इस परिणाम में एबीवीपी के राजपाल...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:16 AM IST
राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव परिणाम मंगलवार को जारी होगा। इस परिणाम में एबीवीपी के राजपाल चौधरी और एनएसयूआई के बागी निर्दलीय प्रत्याशी विनोद जाखड़ के बीच सीधी टक्कर रहेगी। हालांकि परिणाम निर्दलीय के पक्ष में रहना तय है। अगर विनोद जाखड़ जीते तो राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहला मौका होगा जब एससी केटेगरी का छात्र राजस्थान यूनिवर्सिटी का अध्यक्ष बनेगा। हालांकि वर्ष 2015 में एबीवीपी ने एससी केटेगरी के छात्र राजकुमार बिवाल को मैदान में उतारा था लेकिन वह रिकार्ड वोटों से हार गए थे। पहली बार विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्र जातियों के बंधन तोड़कर निर्दलीय एससी के छात्र को अध्यक्ष पद पर जीताकर जातियों का समीकरण लगाने वाले संगठनों को मात देंगे। उधर महासचिव पद पर एबीवीपी को सफलता के चांस दिख रहे हैं। एबीवीपी के दिनेश चौधरी को सफलता मिलने के आसार लग रहे हैं।

राजपाल-विनोद के बीच सीधी टक्कर, पहली बार निर्दलीय एससी हो सकता है अध्यक्ष

संगठनों के प्रत्याशियों की सहानुभूति पर बागी की लहर भारी ही दिखी

एबीवीपी के प्रत्याशी राजपाल चौधरी ने सहानुभूति बटोरने के लिए खुद को अनाथ बताया है। उनके माता- पिता की एक हादसे में मृत्यु हुई थी, जिसका उन्होंने और एबीवीपी संगठन ने जमकर प्रचार किया था।

एनएसयूआई प्रत्याशी रणवीर सिंघानिया ने भी खुद पर हमले और प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु पूनियां पर हुए हमले के बदले में चुनावी सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया था। खून में सनी फटी शर्ट पहनकर ही प्रचार किया।

दोनों की सहानुभूति पर बागी विनोद जाखड़ भारी बताए जा रहे हैं। वजह-इनकी छात्रों के बीच अच्छी पैठ है। साथ ही संगठनों ने अपने प्रत्याशियों से भारी-भरकम पैसा खर्च करवाया, बागी अपने दम पर हैं।

क्यों भारी है बागी: राजस्थान यूनिवर्सिटी में वर्ष 2016 और 2017 में भी निर्दलीय प्रत्याशी ही चुनाव जीते थे। जीतने वाले एबीवीपी के बागी थे। दरअसल आम संगठनों द्वारा रुपए लेकर और खर्चा कराकर चुनाव लड़ाने की परम्परा आम छात्र को पसंद नहीं है।

इधर, मेडिकल कॉलेज चुनाव खारिज, स्टूडेंट्स पर होगी कार्रवाई

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स ने भले ही अपने स्तर पर चुनाव करा लिए हों लेकिन कॉलेज प्रशासन ने उनका चुनाव खारिज कर दिया। कॉलेज प्रशासन अब नियम विरुद्ध चुनाव कराने वाले स्टूडेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। कॉलेज प्रशासन की ओर से ऐसे स्टूडेंट्स की सूची तैयार करवाई जा रही है। कॉलेज प्रशासन का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट और लिंगदोह कमेटी निर्देशानुसार ही मेडिकल कॉलेज में चुनाव हो सकते हैं और वे ही मान्य होंगे। इनके विपरीत कोई भी चुनाव हुए हैं वो मान्य नहीं होंगे। मेडिकल स्टूडेंट इन्हीं चुनावों को मान्यता दिए जाने पर अड़े हैं तो कॉलेज प्रशासन ने इसे अमान्य करार दिया है।