राजस्थान / कभी घर-घर भास्कर अखबार डाला, अब टीम राजस्थान के मेन बॉलर



Tanveer ul haq main bowler of rajasthan ranji team success story
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Tanveer ul haq main bowler of rajasthan ranji team success story

  • 9 मैचों में 300 से ज्यादा ओवर डाल चुके हैं और 47 विकेट लेकर अनिकेत चौधरी के साथ संयुक्त शीर्ष पर हैं

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 11:33 AM IST

संजीव गर्ग. जयपुर. तनवीर उल हक राजस्थान रणजी टीम का अहम हिस्सा हैं। वे लेफ्टी मीडियम पेसर हैं। इस सीजन 9 मैचों में 300 से ज्यादा ओवर डाल चुके हैं और 47 विकेट लेकर अनिकेत चौधरी के साथ संयुक्त शीर्ष पर हैं। करियर में काफी उतार-चढ़ाव भी आए। बैट्समैन बनना चाहते थे लेकिन जब जरूरी था तब बल्ला खरीदने के लिए पैसे इकट्ठे नहीं हो सके तो बॉलर ही बन गए। 

एसएमएस स्टेडियम में तनवीर से क्रिकेट करियर के बारे में हुई बातचीत

  1. किस तरह क्रिकेट की शुरुआत हुई ? 


    मेरे घर के सामने एक भैया रहते थे। उनका नाम था दुष्यंत त्यागी। वे प्रैक्टिस के लिए जाते थे। एक दिन मैंने उनसे कहा, भैया क्या मैं भी आपके साथ चल सकता हूं। आपको बॉलिंग कर दिया करूंगा। उन्होंने कहा कि वहां जो सर (सुमेंद्र तिवारी) हैं वो बहुत सख्त हैं। कई बार कहने पर वे मुझे साथ ले जाने लगे। मैं बैट्समैन बनना चाहता था लेकिन बैट खरीदने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए बॉलिंग करने लगा। लेफ्ट आर्म स्पिन करता था तो वे मेरी गेंदों पर बहुत रन बनाते थे। फिर मैंने उन्हें तेज गेंदबाजी डालनी शुरू की। 

  2. वालिद ने कितना सपोर्ट किया और क्या करते हैं? 

     

    मेरे वालिद धौलपुर में टेलर की दुकान पर काम करते हैं। घर की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं थी तो पैसे से तो सपोर्ट नहीं कर पाते थे लेकिन खेलने से कभी नहीं रोका। आज मैं क्रिकेट खेल रहा हूं तो इसके लिए मैं सुमेंद्र सर का शुक्रिया अदा करता हूं। आज मैंने जो चप्पल पहन रखी है या फिर मेरे सिर पर जो कैप, उन्हीं की देन है। शुरू में वो मुझे व्हाइट्स पहनकर आने के लिए कहते थे तो मैं पापा का पजामा और कुर्ता पहनकर चला जाता था। जब उन्हें मेरी स्थिति का पता चला तो पूरी तरह से सपोर्ट किया। 
     

  3. क्लब क्रिकेट के दौरान कौन खर्च उठाता था? 


    क्लब क्रिकेट के दौरान कोई खिलाता ही नहीं था। क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं होते थे। लेकिन मैं टीम के साथ जरूर जाता था। बच्चे बस में बैठते थे। मैं उनकी किट लेकर बस की छत पर बैठता। अंपायर मोहम्मद अमजद खान ने क्लब से खेलने के लिए मुझे पैसे देने शुरू किए। 

  4. तेज गेंदबाज के लिए फिटनेस जरूरी होती है, इसके लिए क्या करते हो? 


    फिटनेस के लिए मैचों के दौरान कम, ऑफ सीजन में ज्यादा काम होता है। उस समय मसल्स मजबूत करने के लिए काम करना पड़ता है। मैंने ऐसा ही किया। इसलिए मैं रणजी में लगातार 9 मैच खेलने में सफल रहा। 

  5. कर्नाटक मजबूत टीम है, क्वार्टर फाइनल उसी के साथ उसी के घर में खेलना है? 


    इस सीजन हमारी टीम लगातार अच्छा कर रही है। बॉलर्स ने अच्छा किया है। अब बैट्समैन भी अच्छा कर रहे हैं। जो भी सिचुएशन होगी और जैसी भी पिच होगी, हमें जीतने के लिए अपना बेस्ट देना होगा। इंशाअल्लाह हम जीतने में सफल रहेंगे। कप्तान महिपाल लोमरोर अग्रेसिव हैं और खिलाड़ियों को लगातार मोटीवेट करते रहते हैं। 

  6. क्रिकेट महंगा खेल है, खर्चा कैसे चलता था? 

     

    मेरे पास तो डाइट के पैसे भी नहीं होते थे। इसके लिए मैंने कार गैरेज में काम किया। घर-घर अखबार डाले। भास्कर अखबार भी डाला। रेहड़ी पर बच्चों के कपड़े भी बेचता था। लेकिन इन सबके बारे में मेरे वालिद को पता नहीं था। घर से छुप कर ही मैं ये काम करता था। सुबह 5.30 उठता, नमाज पढ़ने जाता। वहां से किसी दोस्त की साइकिल लेता। अखबार के सेंटर जाता और घर-घर अखबार डालता। एक बार गाड़ी से टक्कर हो गई तो मेरी भौं पर कट लग गया तब पापा को पता चला तो उन्होंने डांटा और कहा, बेटा तुझे खाना तो हम खिला ही सकते हैं, ये काम छोड़ दे। 

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