जयपुर / स्कूल-अटल सेवा केंद्रों में चल रहीं तहसीलें, कर्मचारी तक नहीं, दो दफ्तरों में उलझे लोग

वर्तमान में अलवर तहसील की स्थिति। वर्तमान में अलवर तहसील की स्थिति।
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वर्तमान में अलवर तहसील की स्थिति।वर्तमान में अलवर तहसील की स्थिति।

  • मुश्किलें और बढ़ गईं, सात माह पहले सीएम ने 7 नई तहसीलों का किया था ऐलान
  • केवल दाे से तीन कार्मिकाें के भराेसे पूरी तहसील छाेड़ी, तहसीलदार तक नहीं लगाए

दैनिक भास्कर

Feb 03, 2020, 04:10 AM IST

जयपुर (श्याम राज शर्मा). छह महीने पहले बजट में सीएम अशाेक गहलाेत ने प्रदेश में सात नई तहसीलें बनाने का ऐलान किया था, लेकिन इनमें से ज्यादातर तहसीलें पुराने स्कूल या फिर अटल सेवा केंद्र में चल रही हैं। राज्य सरकार ने यहां तहसीलदार तक नहीं लगाए। केवल दाे से तीन कार्मिकाें के भराेसे पूरी तहसील छाेड़ दी गई है।

तहसीलदार व नायाब तहसीलदार अतिरिक्त चार्ज पर  काम देख रहे हैं। जमीनों का रिकॉर्ड पुराने व नए दफ्तरों के बीच बिखरा पड़ा है। राजस्व विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर अपनी जिम्मेदारी तो पूरी कर ली, लेकिन रेवन्यू बोर्ड ने अभी दफ्तर खोलने व तहसीलदार लगाने के मामले की मॉनिटरिंग ही नहीं शुरू की है।

बजट में यह हुआ था ऐलान

मुख्यमंत्री ने बजट सत्र मेंं प्रदेश में पांच उपखंड, सात तहसील व चार उपतहसील बनाने की घोषणा की थी। नए उपखंड व तहसीलों में कामकाज छह महीने बाद भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। सरकार ने जमीनों के विवाद जल्दी निपटाने, रिकॉर्ड का सही संधारण व लोगों के काम शीघ्र कराने के लिए नई तहसील व उपतहसील खोली थी। हालांकि दफ्तर, अफसर व कर्मचारी नहीं होने से इस सुविधा का फायदा आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों को पुराने व नई तहसीलों के बीच चक्कर लगाना पड़ रहा है। रेवन्यू केसों का रिकॉर्ड इधर-उधर होने से सुनवाई अटक गई है।

यह बनी है नई तहसील

राहुवास (दौसा): नई तहसील अटल सेवा केंद्र में चल रही है। यहां केवल दो कर्मचारी बैठे रहते हैं। तहसील रामगढ़ पचवारा का पुनर्गठन कर बनाया था इसलिए रामगढ़ पचवारा तहसीलदार सुधारानी मीना को ही राहुवास तहसीलदार का भी चार्ज दे रखा है। इसके लिए 15 पंचायतों के करीब 60 गांवों के लोगों को अभी भी काम करवाने के लिए 20 किलोमीटर दूर रामगढ़ पचवारा ही जाना पड़ता है। 
नारायणपुरा (अलवर): थानागाजी और बानसूर तहसील का पुनर्गठन कर बनाया गया है। यहां पर केवल नायब तहसीलदार व कर्मचारी उपतहसील की तरह ही काम कर रहे हैं। कार्यालय पुरानी ग्राम पंचायत के दफ्तर में चल रहा हैै। नई बिल्डिंग बन गई, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। यहां तहसीलदार नहीं होने से थानागाजी तहसील में ही जाना पड़ता है।  
सिद्धमुख (चूरू): तहसील राजगढ़ का पुनर्गठन कर बनाया गया है। लेकिन लोगों को तहसीलदार से संबंधित काम के लिए 35 किलोमीटर दूर राजगढ़ ही जाना पड़ता है। सिद्धमुख में पहले के समान उपतहसील ही काम कर रही हैं और नायब तहसीलदार की पोस्टिंग है। लोगों का कहना है कि केवल घोषणा है, धरातल पर कुछ नहीं।
सूरौठ (करौली):  हिण्डौन तहसील का पुनर्गठन कर बनाया है। यहां का चार्ज भी हिण्डौन तहसीलदार के पास ही है। उपतहसील के लिए कुछ साल पहले बनी बिल्डिंग में केवल दो कर्मचारी व एक चतुर्थश्रेणी कर्मचारी बैठता है। लोगों को काम करवाने के लिए सूरौठ व हिंडौन के बीच चक्कर लगाने पड़ते हैं। पहले यहां लगाए नायब तहसीलदार ने भी ज्वाइन नहीं किया था। ऐसे में तहसील बनने का जनता को कोई फायदा नहीं हुआ।देलवाड़ा (राजसमंद): नाथद्वारा तहसील का पुनर्गठन कर बनाया है।
 मनियां (धौलपुर): तहसील धौलपुरा का पुनर्गठन कर बनाया है।
सीकरी (भरतपुर): तहसील नगर से बनाया है।

यह है नई उपतहसील
प्रतापगढ़ (अलवर):
यहां नायब तहसीलदार व कर्मचारियों की पोस्टिंग करना तो दूर अभी तक दफ्तर ही नहीं खुला है। लोगों को काम करवाने के लिए 27  किलोमीटर दूर थानागाजी जाना पड़ रहा है।
खेरली मंडी (अलवर):  स्कूल की खाली बड़ी बिल्डिंग में उपतहसील कार्यालय खोलना तय हुआ है। लेकिन यहां पर नायब तहसीलदार की पोस्टिंग हो गई है, लेकिन दफ्तर नहीं होने से अभी तक नायब तहसीलदार व कर्मचारी नहीं बैठते हैं। लोगों को जमीन संबंधी काम करवाने के लिए 15 किलोमीटर दूर कठूमर ही जाना पड़ता है।
भाण्डारेज (दौसा): इस को दौसा का पुनर्गठन कर बनाया है। हालांकि कार्यालय दौसा में ही चल रहा है। यहां पर तीन दिन पहले ही नायब तहसीलदार की पोस्टिंग हुई है।
हलैना (भरतपुर): वैर तहसील का पुनर्गठन कर बनाया है।

इन्हें बनाया उपखंड
मुख्यमंत्री ने बजट सत्र के दौरान अराई (अजमेर), मालाखेड़ा (अलवर), गडरारोड (बाड़मेर), बज्जू (बीकानेर) व लोहावट (जोधपुर) उपखंड बनाने क घोषणा की थी। मालाखेड़ा सहित कुछ जगह तो नया सबडिवीजन बनाने की जगह ही तय नहीं हो पाई है। नए उपखंड केवल सरकारी कागजों में ही चल रहे हैं। ऐसे में छह महीने बाद भी मुख्यमंत्री की घोषणा का फायदा नहीं मिल पा रहा है।

वित्त विभाग ने बजट जारी किया

राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव राजेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की बजट सत्र के घोषणा के अनुसार तहसील व एसडीएम दफ्तर बना दिए है। वित्त विभाग ने बजट जारी कर दिया है। रेवन्यू बोर्ड तहसीलदार लगा रहा है और जिला प्रशासन कर्मचारी लगाएगा।

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