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5 साल तक बताया हैडमास्टर के खाली पद नहीं, अब उन्हीं वर्षों में निकले 1900 खाली पद

शिक्षा विभाग की लापरवाही का शिकार हुए 2100 वरिष्ठ अध्यापक, समय पर पदोन्नति न होने से प्रिंसिपल पद पर नहीं हो सकेंगे...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:11 AM IST
शिक्षा विभाग की लापरवाही का शिकार हुए 2100 वरिष्ठ अध्यापक, समय पर पदोन्नति न होने से प्रिंसिपल पद पर नहीं हो सकेंगे पदोन्नत

भास्कर न्यूज | जयपुर

दस साल पहले पातेय वेतन पर हैडमास्टर के पद पर लगाए गए वरिष्ठ अध्यापकों को शिक्षा विभाग की एक लापरवाही भारी पड़ रही है। पहले तो उनको पद खाली नहीं होने का हवाला देते हुए विभाग ने पदोन्नति देने से इंकार कर दिया। अब उन्हीं सालों में पद खाली दिखाते हुए पदोन्नति देने की तैयारी है। इसको लेकर इन वरिष्ठ अध्यापकों में रोष है।

मामले के अनुसार प्रदेशभर में करीब 2100 वरिष्ठ अध्यापक पातेय वेतन पर वर्ष 2008-09 से हैडमास्टर के पद पर काम कर रहे थे। इन वरिष्ठ अध्यापकों की सत्र 2013-14 और 2014-15 में डीपीसी होनी थी। जब इनकी हैडमास्टर के पद पर नियमित पदोन्नति की बात आई तो विभाग ने इन सालों में पदोन्नति करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि पदोन्नति के पद खाली नहीं हैं। बाद में सामने आई विभागीय रिपोर्ट में ही इन्हीं सालों में करीब 1900 पद खाली दिखाए गए। मामले का विरोध हुआ तो अब इन शिक्षकों की उन्हीं वर्षों के हिसाब से रिव्यू डीपीसी की तैयारी है। तब यह शिक्षक अपनी पीड़ा जताने राज्यपाल, मुख्य सचिव, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षा मंत्री सहित कई लोगों के पास पहुंचे थे, लेकिन इनकी एक नहीं सुनी गई। अब उन्हीं वर्षों से हो रही डीपीसी की तैयारी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। तब खाली पद होते हुए भी उनको क्यों छुपाया गया।

यह हुआ नुकसान

वर्ष 2013-14 और 2014-15 में पदोन्नति नहीं होने से ये शिक्षक तब आरपीएससी से चयनित हैडमास्टरों से पीछे हो गए। आरपीएससी से चयनित हैडमास्टर पदोन्नत होकर अब प्रिंसिपल बन चुके हैं। इन वरिष्ठ अध्यापकों की तब डीपीसी हो जाती तो ये आरपीएससी से चयनित हैडमास्टरों से आगे होते। विभागीय लापरवाही से इनको आर्थिक के साथ पद का नुकसान भी उठाना पड़ा है।