खुलासा / जोड़ों का दर्द दूर करने वाली दवा में दर्द मिटाने वाले तत्व ही नहीं; किसी में शून्य घटक मिले तो कुछ में दूसरे केमिकल

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • शून्य घटक पाए जाने पर मरीजों की जान भी जा सकती है
  • मरीजों को इन दवाओं से फायदे की जगह सेहत बिगड़ने का खतरा

दैनिक भास्कर

Jan 20, 2020, 02:21 AM IST

जयपुर (सुरेन्द्र स्वामी). नकली दवाओं के बाजार में बिकने से आमजन की सेहत बिगड़ने का खतरा है। कंपनियों की लापरवाही से शून्य घटक पाए जाने पर मरीजों की जान पर बन आती है। जोड़ों के दर्द व सूजन कम करने वाली ग्लूकोसामीन एंड डायसेरिन टेबलेट की जांच में शून्य घटक पाया गया है। 

ग्लूकोसामीन सल्फेट पोटेशियम क्लोराइड पोषक तत्व व हड्‌डी को मजूबत बनाने वाला डायसेरिन ही मौजूद नहीं। ऐसे में गठिया के मरीजों को दी जाने वाली दवा से फायदे की बजाय सेहत बिगड़ने का खतरा है। दर्द को कम करने वाला डाइक्लोफेनिक सोडियम इंजेक्शन की जांच में भी घातक मिला है। इंजेक्शन से पर मरीज की जान जा सकती है। अमानक पाए जाने वाले बैच को बैन लगा दिया गया है। 

रिपोर्ट आने तक मरीजों में बंट जाती हैं दवाएं 
बाजार में बिक रही दवाओं की जांच का जिम्मा चिकित्सा विभाग के औषधि नियंत्रण संगठन का है। जांच के लिए एकमात्र लैब व पर्याप्त स्टाफ की कमी के चलते पेंडेंसी का ग्राफ बढ़ रहा है। ऐसे में जांच में अमानक और नकली साबित होने वाली दवाएं भी रिपोर्ट आने से पहले मरीजों तक पहुंच चुकी होती हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलोजी विभाग के लोकेन्द्र शर्मा  कहना है कि दवाओं की एक्सपायरी डेट एक से दो साल की रहती है, ऐसे में जब तक जांच रिपोर्ट बनती है, तब तक प्रदेश में बड़ी मात्रा में दवा खप चुकी होती है।

तीन लैब बन जाएगी तो जांच जल्द होगी

प्रदेश में अभी एक ही सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब है। जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर में तीन और नई लैब के संचालित होने के बाद पेंडेसी कम हो जाएगी। उपकरणों की खरीद की जा रही है।
डॉ.रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री
लैब की जांच में फेल होने पर औषधि नियंत्रण अधिकारियों  को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत संबंधित दवाओं का स्टॉक जब्त कर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
राजाराम शर्मा, ड्रग कंट्रोलर

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