राजस्थान / विधानसभा हो या लोकसभा, सियासी समीकरण ऐसे कि इन नेताओं पर पार्टियां हर चुनाव में लगाती हैं दांव



These leaders fight elections in both the assembly and the Lok Sabha
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These leaders fight elections in both the assembly and the Lok Sabha

  • लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कई बड़े चेहरों पर दांव खेला 

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2019, 04:31 AM IST

जयपुर. गरमी के मौसम के साथ-साथ प्रदेश का सियासी पारा भी तेजी से चढ़ रहा है। लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कई बड़े चेहरों पर दांव खेल दिया है। इन चेहरों में कई चेहरे ऐसे भी हैं जो पार्टी के लिए हर तरह के चुनावों के सियासी समीकरणों में फिट बैठते हैं। इसीलिए इन्हें कभी विधानसभा तो कभी लोकसभा चुनावों में पार्टी अपना चेहरा बना लेती है।

 

भाजपा ने अब तक लोकसभा चुनाव में जो प्रत्याशी घोषित किए हैं उनमें भागीरथ चौधरी, नरेंद्र खीचड़ और कनकमल कटारा और ओम बिड़ला विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस में मानवेंद्र सिंह, श्रवण कुमार, रामनारायण मीणा, रघुवीर मीणा, ताराचंद भगोरा व गोपाल सिंह इडवा विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। इन प्रत्याशियों के अलावा भाजपा और कांग्रेस में कई चेहरे हैं जो लोकसभा के साथ विधानसभा में भी अपनी धाक जमा चुके हैं।

 

कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा, विधनसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारिया, हरीश चौधरी, वहीं भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे, गुलाबचंद कटारिया, श्रीचंद कृपलानी इस सूची में शीर्ष पर हैं।

 

भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में ऐसे नेता-

 

  • भागीरथ चौधरी : अजमेर की किशनगढ़ सीट से 2014 में विधायक चुने गए। 2018 के विधानसभा चुनावों में इन्हें टिकट नहीं मिला। अब भाजपा ने इन्हें अजमेर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। 
  • नरेंद्र खीचड़ : मंडावा से तीन बार विधायक रह चुके हैं। अब पार्टी ने मौजूदा सांसद संतोष अहलावत का टिकट काट कर इन्हें लोकसभा प्रत्याशी बनाया है। 
  • कनकमल कटारा : 2004 में विधायक चुन कर भाजपा सरकार में मंत्री बने। अब भाजपा ने मौजूदा विधायक मानशंकर निनामा का टिकट काट कर इन्हें बांसवाड़ा से प्रत्याशी घोषित किया है। 
  • मानवेंद्र सिंह : कांग्रेस की ओर से बाड़मेर संसदीय सीट से प्रत्याशी के तौर पर उतारे गए मानवेंद्र सिंह 2004 में भाजपा के टिकट पर सांसद बने थे। 2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर शिव विधायक बने। 2018 में भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। झालावाड़ में वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़कर हारे। अब कांग्रेस ने उन्हें बाड़मेर से लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया है।   
  • रामनारायण मीणा : पीपलदा से कांग्रेस के विधायक हैं। अब पार्टी ने इन्हें कोटा लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। इससे पहले ये 9वीं, 10वीं, 12वीं, 13वीं और 15वीं विधानसभा में भी विधायक रह चुके हैं। 

 

 

इन बड़े चेहरों की लोकसभा-विधानसभा में बराबर धाक -

 

  • अशोक गहलोत- 1980 से 1998 तक पांच बार सांसद रहे। 1999 से 2018 तक लगातार पांच बार विधायक चुने गए।   
  • वसुंधरा राजे-1989 से 2003 तक पांच बार सांसद रहीं। 1985, 2003,2008,2013 व 2018 में विधायक चुनी गईं। 
  • सचिन पायलट- 2004 में दौसा व 2014 में अजमेर सांसद चुने गए। इसके बाद 2018 में टोंक से विधायक चुने गए।  
  • हरीश चौधरी- सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। 15वीं विधानसभा में विधायक चुने गए। 2009 में बाड़मेर से सांसद चुने गए। 2018 विधानसभा चुनावों में फिर विधायक चुने गए। 
  • डॉ.सीपी जोशी- दो बार सांसद और छह बार के विधायक हैं। 1980, 1985,1998,2003,2009,2018 में विधायक चुने गए। 2009 से 2013 तक सांसद रहे और केंद्र में मंत्री भी बने। 
  • ओम बिड़ला: 2014 से सांसद तथा 2003 से 2014 तक तीन बार विधायक बने। 
  • लालचंद कटारिया : 2003 से 2008 तक विधायक, 2009 में सांसद,  
  • किरण माहेश्वरी: 2004 से 2009 तक सांसद रहीं। इसके बाद 2013 में विधायक चुनी गईं। 
  • डॉ.करण सिंह यादव: 1998 से 2004 तक विधायक,2004 से 2009 तक सांसद, 2018 के उप चुनावों में फिर सांसद चुने गए। 
  • जसवंत यादव : 1998 से 99 तक विधायक, 1999 में  सांसद बने, 2014 में विधायक चुने गए। 2018 के सांसद के उपचुनाव में फिर लड़े लेकिन हार गए। 
  • श्रीचंद कृपलानी : 1989 से 1999 तक दो बार विधायक रहे, 1999 में सांसद बने, 2004 में फिर सांसद चुने गए 
  • डॉ.रघु शर्मा : 13वीं व 15वीं विधानसभा में चुने गए। 2018 में अजमेर से उपचुनाव जीत सांसद बने। इसके बाद पार्टी ने उन्हें 2019 में फिर विधानसभा चुनावों का टिकट दिया और वे जीते।
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