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जिले में 6 टोल बूथ, 68 में से 48 लेन फास्ट ट्रैक, फिर भी वाहनों की कतारें

जयपुर जिले की सीमा से लगते यदि छह टोल प्लाजाओं की बात करें तो यह स्थिति बेहद दुखद है।

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 06:50 AM IST
Toll Management Negligence

जयपुऱ. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से संचालित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के तहत फास्ट ट्रैक अपने मूल ध्येय से भटक गया है। नेशनल हाइवे पर लंबी दूरी के वाहन चालकों को बिना रुकावट सफर कराने के लिए शुरू कराए गए इस प्रोग्राम का टोल प्लाजा प्रबंधन की लापरवाही के चलते लाभ नहीं मिल पा रहा है। जयपुर जिले की सीमा से लगते यदि छह टोल प्लाजाओं की बात करें तो यह स्थिति बेहद दुखद है। यहां फास्ट ट्रैक की अलग लाइन हमेशा वाहनों के जमावड़े से अटी पड़ी रहती है।


क्या है फास्ट ट्रैक? : फास्ट ट्रैक आरएफआईडी रेडियो तरंगों के माध्यम से हमें टोल प्लाजा पर सीधे भुगतान संभव करवाता है। यह एक पहचान पत्र के स्वरूप में होता है, जो वाहन के मूल फ्रन्ट ग्लास पर लगा होता है। इसकी वैधता पांच वर्ष की होती है। इसका मुख्य उद्देश्य केन्द्र सरकार की कैशलैस योजना को क्रियान्वित करना है।

टोल प्रबंधन की लापरवाही से फास्ट ट्रैक की लाइन में दूसरे वाहनोें के आने से जाम

योजना : प्रत्येक टोल प्लाजा पर फास्ट ट्रैक वाले वाहनों के लिए अलग लेन बनाई गई है, जहां से वाहन बिना किसी रोकटोक के आसानी से निकल सके। इस योजना को 1 अक्टूबर 2017 में केन्द्र सरकार ने शुरू की थी। इसके लिए इंटरनेट बैंकिंग जरूरी है।
मकसद : ईंधन व समय की बचत उपयोगकर्ता के लिए उपयोगी साबित होती। मगर टोल प्लाजाओं पर उसके प्रबंधन की उदासीनता से ऐसा सम्भव नहीं हो रहा है। इससे फास्ट ट्रैक कार्यक्रम से उपयोगकर्ताओं का रुझान हट रहा है।

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