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किसानों के मुआवजे में हो रही देरी पर बरसे पर्यटन मंत्री, कहा- जयपुर में बैठे अधिकारी मूक बधिर बने, बदनाम हो रही सरकार

एक वर्ष पहले
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पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह- फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह- फाइल फोटो।
  • भरतपुर जिले के एक गांव में किसान के आत्महत्या मामले पर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अधिकारियों को फटकार लगाई
  • सिंह ने कहा- सरकार की ओर से 5 लाख रुपए का चैक दिया गया है, जो भी मदद हमसे हो रही है करने आया हूं

भरतपुर. पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह बुधवार को एक बार फिर जयपुर के अधिकारियों पर बरसे। भरतपुर जिले के एक गांव में किसान के आत्महत्या मामले पर सरकार की ओर से मदद में देरी को लेकर वे जयपुर में बैठके अधिकारियों पर जोरदार तरीके से बरसे। विश्वेंद्र सिंह बुधवार को किसान के घर पहुंचे थे। 

किसान के परिजनों को 5 लाख की सहायता की
विश्वेंद्र सिंह ने किसान के परिजनों को 5 लाख रुपए का सहायता राशि का चैक सौंपा। इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए सिंह ने कहा कि कर्जें से डूबे किसान ने आत्महत्या की है। इस पर मैं संवेदना प्रकट करने आया हूं। सरकार की ओर से 5 लाख रुपए का चैक दिया गया है। जो भी मदद हमसे हो रही है करने आया हूं। सिंह ने कहा कि 9 तारीख को अशोक चांदना आए थे। हम दोनों ने उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय में फोन करके अवगत करा दिया था। यह खेद की बाद है अधिकारियों ने मदद करने में 48 घंटे लगा दिए। कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी मौजूद है। आज भी डेढ़ बजे से हल्ला मचा रहा हूं तब जाकर साढे तीन बजे चेक तैयार हुआ है। अगर किसान को समय पर मदद नहीं मिलती है तो इससे अधिक शर्मनाक बात कोई और नहीं हो सकती। यहां तक की यहां एमपी अाैर एमएलए तक मिलने नहीं अाए।

पर्यटन मंत्री ने देरी के लिए ग्रामीणों से मांगी माफी 
गांव वालों से क्षमा याचना करते हुए सिंह ने कहा कि मदद करने में हमें इतना समय लग गया। इसके लिए मैं गांव वालों से सार्वजनिक रूप से सरकार और अपनी तरफ से क्षमा याचना करता हूं। जयपुर में बैठे अधिकारी ऐसे हैं जो मूक बधिर बनकर बैठे हैं। जो सरकार को बदनाम करने में लगे हैं। यह सरकार किसान के प्रति समर्पित है और अच्छे काम करना चाहती है। हम 24 घंटे मदद की कोशिश करते हैं, लेकिन अधिकारी बदनाम करने में लगे हैं। मेरी डायरेक्ट सीएमओ में बात हुई थी। यह तो तब है जब मैं खुद मंत्री हूं। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सभी किसान के लिए समर्पित है। एक मृतक किसान के परिजनों के सहायता पहुंचाने में अधिकारियों को 48 घंटे लग गए। उनको एक चैक ही तो काटना था।

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