एसीबी कोर्ट / यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को क्लीनचिट, एकल पट्‌टी जारी करने का मामला



UBH Minister Shanti Dhariwal gets clean chit by ACB
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UBH Minister Shanti Dhariwal gets clean chit by ACB

  • एसीबी ने जांच अधिकारी की रिपाेर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस केस में धारीवाल की कोई संलिग्नता नहीं
  • मामले में आराेपी तत्कालीन उपायुक्त दुर्गा जोशी का निधन हाेने के कारण उनका नाम जांच से अलग

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 11:51 PM IST

जयपुर. करीब 8 साल पहले गणपति कंस्ट्रक्शन कंपनी काे एकल पट्‌टा जारी करने के चर्चित मामले में एसीबी ने मौजूदा व तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और तत्कालीन यूडीएच उप सचिव एनएल मीणा को क्लीन चिट दे दी।

 

गुरुवार को एसीबी मामलों की विशेष कोर्ट-1 में पेश प्रगति रिपाेर्ट में एसीबी ने जांच अधिकारी व एसपी शरद चौधरी की रिपाेर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन दाेनाें की इस केस में कोई संलिग्नता नहीं है। इसलिए इन्हें जांच से अलग किया जा रहा है। इनके अलावा तत्कालीन जेडीसी ललित के. पंवार और जेडीए के तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त वीएम कपूर के खिलाफ जांच लंबित रखी गई है। मामले में आराेपी तत्कालीन उपायुक्त दुर्गा जोशी का निधन हाेने के कारण उनका नाम जांच से अलग कर दिया गया है।


पट्‌टा गणपति कंस्ट्रक्शन कंपनी को 2011 में जारी किया गया था। गुरुवार काे काेर्ट में एसीबी की ओर से विशेष अधिवक्ता बीएस चौहान ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट पेश की। उल्लेखनीय है कि इस केस में एसीबी ने पूर्व में शांति धारीवाल से पूछताछ की थी। एसीबी ने उनके खिलाफ जांच लंबित रखी थी। मामले में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल को नए आईओ शरद चौधरी को नियुक्त किया था। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से मामले में लंबित अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट पेश मंगवाने का प्रार्थना पत्र दायर किया गया। इस पर कोर्ट ने 14 मई काे आईओ से लंबित जांच के संबंध में प्रगति रिपोर्ट पेश करने काे कहा था।

 

मामले में छह आरोपियों के खिलाफ एसीबी ने चालान पेश किया था और मामला चार्ज बहस में चल रहा है। बता दें कि एसीबी ने 2016 में परिवादी रामशरण सिंह की गणपति कंस्ट्रक्शन कंपनी को एकल पट्टा जारी करने में हुई धांधली की शिकायत पर केस दर्ज किया था। इसमें कंपनी के प्रोपराइटर शैलेन्द्र गर्ग, यूडीएच के पूर्व सचिव जीएस संधू, जेडीए जोन-10 के तत्कालीन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, निष्काम दिवाकर और गृह निर्माण सहकारी समिति के पदाधिकारी अनिल अग्रवाल व विजय मेहता काे आराेपी बनाया गया।

 

मामले में संधू पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी के प्रोपराइटर शैलेन्द्र गर्ग को एकल पट्टा जारी करने के लिए पूर्व के निर्णय को नजरअंदाज कर नई फाइल चला दी और तीन ही दिन में पट्टा जारी कर दिया। जबकि वर्ष 2005 में पट्टा जारी करने पर रोक लग गई थी। इसके बावजूद वर्ष 2010 में एक बैठक कर पट्टा जारी करने के लिए नियम विरुद्ध फाइल चलाई।

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