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राजस्थान / आज 7 दिसंबर है, आप निर्णायक भूमिका में यानी पंचपरमेश्वर हैं; इसलिए वोट जरूर करें



Voting today, cast vote
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Voting today, cast vote

  • एक-एक वोट कीमती है, वोट न डालने के बहाने आज तो बिल्कुल भी नहीं चलेंगे
  • सुबह 8 से शाम 5 बजे तक डाल सकेंगे वोट, सरकारी-निजी दफ्तरों में छुट्‌टी के आदेश

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 06:45 AM IST

जयपुर. 15वीं राजस्थान विधानसभा के लिए 7 दिसंबर को मतदान होगा।राजस्थान विधानसभा की 200 में से 199 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होगा। अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह का निधन होने की वजह से चुनाव टाल दिया गया है। आज आपका वोट अगले 5 साल तय करेगा। इसलिए अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें।

 

बहाना 1 : मैं वोट देने नहीं जाऊंगा तो क्या फर्क पड़ेगा?

फर्क तो पड़ेगा : चुनाव में एक-एक वोट कीमती है। वर्ष 2008 में नाथद्वारा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता सीपी जोशी एक वोट से हार गए थे। अप्रैल 1999 में प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई थी। 

 

Assembly Election 2018

 

 

बहाना 2 : प्रत्याशी अनाज थोड़े देंगे...क्यों वोट करूं?

इसलिए करें : मतदान करना अपना अधिकार है। अगर हम वोट नहीं डालेंगे तो कोई गलत आदमी चुनकर आ जाएगा।  गलत व्यक्ति के चुनकर आने का असर हमारी योजनाओं पर पड़ेगा। इसलिए वोट डालने के लिए जरूर जाएं।

 

 Assembly Election 2018

 

बहाना 3 : पसंद के प्रत्याशी नहीं हैं, क्यों वोट दूं?

नोटा तो है: अगर एक भी प्रत्याशी आपको पसंद नहीं है तो भी संविधान ने आपको वोट का हक किया है। आप वोट देने जाएं क्योंकि वहां नोटा भी एक विकल्प है। अगर नोटा को वोट ज्यादा मिले तो वहां दोबारा चुनाव कराए जाएंगे।

 

 Assembly Election 2018

 

 

बहाना 4 : बूथ घर से दूर है, वहां कैसे जाएंगे? 

जाना ही चाहिए: थोड़ा परेशान होंगे,  पर वोट डालने जरूर जाएं। यह बहाना इसलिए नहीं चलेगा, क्योंकि कोई प्रत्याशी आपको बैठाकर ले जाएगा तो आप उसको वोट दे देंगे। इसलिए अपने अपने वाहन से जाएं और अपने विवेक से सही प्रत्याशी को वोट दें।

 

 Assembly Election 2018

 

बहाना 5 : अगली बार डाल देंगे वोट?

कल नहीं आता: वोट के जरिए लोकतंत्र को मजबूत करने का यह सुनहरा अवसर पांच साल में एक बार मिलता है। अगर इस बार चूके तो पांच साल इंतजार करना होगा। ऐसा सुनहरा अवसर हाथ से नहीं निकलने दें। 

 

Assembly Election 2018

 

बहाना 6 : ऑफिस की छुट्टी है। आज तो पार्टी करते हैं। कहीं घूमने चलते हैं?

पहले वोट फिर मौज: पार्टी तो किसी भी दिन हो सकती है। लेकिन अच्छे भविष्य के लिए पार्टी की बजाय वोट डालने जाएं। जैसे सपरिवार पार्टी में जाते हैं। उसी प्रकार वोट डालने के लिए भी सपरिवार जाना चाहिए। 

 

Assembly Election 2018

 

बहाना 7 : लाइन होगी...पता नहीं कब नंबर आएगा?

5 साल का सवाल: बिजली बिल, पानी बिल या कोई अन्य किसी आवेदन के लिए आपको लाइन में लगना तो पड़ता ही है। अगर आप लोकतंत्र के इस पर्व पर एक दिन लाइन में लगकर अगर अपना वोट डाल देंगे तो इससे प्रदेश में अच्छी सरकार बनेगी।   
 

 

 Assembly Election 2018

 

 

बहाना 8 : वोट देने गई तो घर का काम कौन करेगा?

मैनेज करना होगा: घर पर कोई उत्सव होता है तो हम मैनेज करके चलते हैं। 7 दिसंबर को लोकतंत्र का पर्व है। आप दिनभर के काम को इस प्रकार मैनेज करें कि वोट डालने के लिए भी समय मिले। आप मन से प्रयास करेंगी तो  समय जरूर मिल जाएगा।

 

 Assembly Election 2018

 

 

बहाना 9 : मुझे तो छुट्टी नहीं मिली, काम पर जाना है?

जल्दी उठ जाएं: अगर आपको काम पर जाना है तो सुबह जल्दी उठे और मन में ठान लंे कि मैं अपने बूथ पर सबसे पहले वोट डालूं। अगर ऐसा नहीं कर पाए तो दिन में समय निकाल कर या अपने कार्यस्थल से जल्दी आकर वोट डाल सकते हैं। 


 

 Assembly Election 2018

 

 

बहाना 10 : दिन में कभी भी वोट डाल देंगे। इसके लिए तनाव लेने की क्या जरूरत है

आलस से नुकसान: बिजली बिल, पानी बिल या कोई अन्य किसी आवेदन के लिए आपको लाइन में लगना तो पड़ता ही है। अगर आप लोकतंत्र के इस पर्व पर एक दिन लाइन में लगकर अगर अपना वोट डाल देंगे तो इससे प्रदेश में अच्छी सरकार बनेगी।

 

Assembly Election 2018

 

 

मुंशी प्रेमचंद की कहानी से यूं समझें अपनी अहमियत

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पंचपरमेश्वर’ तो आपको याद ही होगी... दो दोस्तों अलगू चौधरी और जुम्मन शेख की कहानी थी। दोनों अच्छे दोस्त थे। सुख-दुख...जीना-मरना..हर पल साथ-साथ। गांव के लोग उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे। फिर खाला(मौसी) से हुए विवाद में सरपंच अलगू चौधरी ने जब जुम्मन शेख के खिलाफ फैसला सुनाया तो उनकी दोस्ती में दरार पड़ गई। आखिरकार एक समय आया जब बैलों की खरीदारी को लेकर हुए अलगू के विवाद की सुनवाई में जुम्मन को पंच बनाया गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि न्याय की गद्दी पर बैठने वाला परमेश्वर होता है...सिर्फ पंच परमेश्वर...और जुम्मन ने बिना किसी राग-द्वेष के फैसला सुनाया।

 

यह कहानी आज क्यों प्रासंगिक...क्योंकि आज 7 दिसंबर है। लोकतंत्र का महापर्व। आज आप ही ‘पंचपरमेश्वर’ हैं और निर्णायक की भूमिका में हैं। आपके ही वोट से राजस्थान के अगले पांच साल का भविष्य तय होगा। मतदान के दौरान आपका न कोई दुश्मन होना चाहिए...न ही दोस्त। आपके जेहन में सिर्फ राजस्थान का उजला भविष्य होना चाहिए। इसलिए घर से निकलिए और वोट दीजिए। आपका एक-एक वोट प्रदेश के भविष्य के निर्माण में ईंट का काम करेगा।

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