जयपुर / टैंकरों की ऑनलाइन ट्रैकिंग पर 1.2 करोड़ खर्च, फिर भी शहर प्यासा



Water crisis in Jaipur
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Water crisis in Jaipur

  • पानी की सप्लाई करने वाले 350 टैंकरों पर जीपीएस ही नहीं
  • जिस कंपनी को ठेका उस पर पानी बेचने पर लग चुकी है 6 लाख रुपये की पेनल्टी

Dainik Bhaskar

Apr 09, 2019, 03:37 AM IST

जयपुर (श्याम राज शर्मा). जलदाय विभाग ने सरकारी टैंकरों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी को सवा करोड़ में काम दे दिया, इसके बावजूद शहर में टैंकरों से सरकारी पानी का कालाबाजारी जमकर हो रही है। सरकारी पानी गरीब व आम जनता की प्यास बुझाने के बजाए होटल, ढाबों, मकान निर्माण व प्राइवेट आरओ प्लांट में बेचा जा रहा है।

 

विभाग 350 टैंकरों की मॉनिटरिंग केवल ड्राइवर के मोबाइल नंबर से कर रहा है। सॉफ्टवेयर का काम विभाग ने द कनसोल कंपनी को दे रखा है। इस कंपनी ने पहले नॉर्थ सर्किल का काम 72 लाख रुपए में लिया था और अब साउथ सर्किल का काम भी 40 लाख रुपए से हासिल कर लिया। दोनों सर्किल का काम एक ही कंपनी को मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। टैंकरों की कालाबाजारी को लेकर नॉर्थ सर्किल के एक डिविजन ने तो 6 लाख रुपए से ज्यादा की पेनल्टी लगाई है। 


विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी का कहना है कि शहर में पानी टैंकरों के 1700 ट्रिप चल रहे हैं। पिछले साल 1900 ट्रिप चल रहे थे  यानि यह सिस्टम लगाने के बाद ट्रिप कम हुए हैं। कुछ टैंकरों पर ‘जलदाय विभाग की ओर से निशुल्क पानी’ की पट्टी नहीं लिखी होने से कंफ्यूजन  है, उसे लिखवाया जा रहा है। वहीं द कनसोल कंपनी के दिनेश सिंह का कहना है कि हमारा सिस्टम बहुत ही बेहतर है। बिना ओटीपी कोई टैंकर का पानी बेच दे तो इसे सॉफ्टवेयर नहीं रोक सकता है। जीपीएस को ड्राइवर खराब कर देते थे। नए सिस्टम से मॉनिटरिंग सख्त हुई है, लेकिन टैंकर चालक नहीं चाहते हैं कि यह सिस्टम काम करे।  

 

श्याम नगर में पानी चोरी में तीन दिन में भी नहीं लिए गए सैंपल
शहर के श्याम नगर में विभाग की टंकी से पानी भर कर बेचने के मामले में जलदाय विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। श्याम नगर विकास समिति के पदाधिकारियों के जरिए पुलिस ने सरकारी पानी को बेचते हुए तीन टैंकर पकड़े थे। तीनों टैंकरों में पानी भरा हुआ है। विकास समिति के सचिव प्रदीप गुगलिया का कहना है कि विभाग ने पानी के सैंपल लेकर जांच भी नहीं की है। वहीं विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी का कहना है कि वहां पर मैसर्स रामरतन जाट को नया टेंडर दिया था। इस कारण टैंकरों पर सरकारी होना नहीं लिखा गया। एक टैंकर उनके जानकार का था। कालाबाजारी नहीं हुई है।

 

यह है मामला : शहर में सरकारी टैंकरों से पानी बेचने व फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जलदाय विभाग अब ऑनलाइन सॉफ्टवेयर और मोबाइल-वेब एप्लीकेशन से मॉनिटरिंग कर रहा है। अब हाईड्रेंट से पानी भरने व टंकी में खाली करने के समय टैंकर पर लगे लेवल इंडिकेटर का फोटो लेकर सॉफ्टवेयर में अपलोड करते हैं। इसके साथ ही उपभोक्ता या स्थानीय व्यक्ति के मोबाइल पर गए ओटीपी बताने के बाद ही टैंकर वेरिफाई होता है। इसके बाद ही विभाग पेमेंट करता है। ‘रियल टाइम वाटर टैंकर ट्रेकिंग मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम’ पर सवा  करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्चा कर रहा है।  नए सिस्टम टैंकरों पर लेवल इंडिकेटर लगाया है। अब ड्राइवर के मोबाइल एप बेस जीपीएस सिस्टम है। ड्राइवर को हाईड्रेंट पर पानी भरते ही लेवल व टैंकर की फोटो सॉफ्टवेयर व एप में अपलोड करना होता है। 
 

शहर में टैंकर चालक इस तरह कर रहे हैं गड़बड़ी  
{टैंकर चालक ओटीपी के लिए अपने साथी का मोबाइल नंबर दे देते हैं, ताकि टैंकर ट्रिप वेरिफिकेशन हो जाए। 
{जिस होटल व ढाबा पर पानी बेचा जाता है, उसी व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है। 
{ जेईएन को रात 12 बजे तक ट्रिप वेरिफाई करना होता है, लेकिन दो -तीन दिन तक टैंकर से पानी डालना वेरिफाई नहीं होता। इसके टैंकर ठेकेदार फायदा उठाते  हैं। 
{ टैंकर पर ‘जलदाय विभाग की ओर से निशुल्क पानी’ की पट्टी नहीं लिखी हुई है। इससे टैंकर धड़ल्ले से बिकते हैं।

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