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एक महिला ने दिया विचित्र बच्चे को जन्म; डॉक्टर बोले- इस कमी से पैदा होते हैं इस तरह के बच्चे, मेडिकल की भाषा में इन्हें 'अनेनसेफली' कहते हैं

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 06:04 PM IST

सिरोही न्यूज: जन्म के कुछ देर बाद बच्चे की मौत, डॉ. ने बताया- प्रसूताओं को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

सिरोही (राजस्थान)। गर्भधारण से तीन माह पूर्व से ही फॉलिक एसिड का सेवन नहीं करना गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए कितना घातक हो सकता है, इसका उदाहरण शुक्रवार को राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालंद्री में तब देखने को मिला जब एक प्रसूता ने विचित्र बच्चे को जन्म दिया।


सात माह से भी कम उम्र के इस बच्चे का सिर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया था। इस तरह के अर्द्ध विकसित बच्चों का प्रसव करवाना बेहद जटिल भी होता है। ऐसे बच्चे या तो गर्भ में या फिर जन्म के तुरंत बाद मर जाते हैं। मेडिकल की भाषा में इस तरह के बच्चे को 'अनेनसेफली' कहते हैं। कालंद्री अस्पताल में जन्मे इस विचित्र बच्चे को देखने के लिए अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लग गई। डॉ. एसएस भाटी ने बताया इस तरह का बच्चा फॉलिक एसिड की कमी के कारण होता है। शादी से थोड़ा पहले या फिर गर्भधारण से करीब तीन माह पहले फॉलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए। फॉलिक एसिड की टेबलेट सभी अस्पतालों में निशुल्क मिलती है।

इस तरह के जटिल प्रसव करवाने में एक्स्पर्ट कालंद्री चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. एसएस भाटी का एक माह में ऐसे ही ग्यारह प्रसव कराने पर 2016 में दर्ज हो चुका है लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम

सिरोही. कालंद्री अस्पताल में जन्मे विचित्र बच्चे के साथ डॉ. एसएस भाटी। जिन्हें इस तरह के जटिल प्रसव कराने के लिए लिम्का बुफ ऑफ नेशनल अवार्ड से नवाजा गया है।


कैसे पता चलता है प्रसूता के पेट में अर्द्ध विकसित हो रहे भ्रूण का
ब्लड टेस्ट में एल्फा फेटोप्रोटीन की अधिक मात्रा दिख सकती है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड में बढ़ते हुए भ्रूण की साउंड वेव से तस्वीर ली जाती है। इससे कोई भी असाधारण बात दिख सकती है। साथ ही एमनियोसेंटीसीस पेट के जरिए एक बड़ी सी सुई से एम्निओटिक थैली से थोड़ा सा द्रव निकाला जाता है। फिर इस द्रव में एल्फा फेटोप्रोटीन और एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ का लेवल मापा जाता है। साथ ही भ्रूण का एमआरआई में मेगनेट से बढ़ते भ्रूण की तस्वीर ली जाती है। इस तकनीक में भ्रूण के दिमाग और अन्य अंग अल्ट्रासाउंड से अच्छी तरह दिखाई देते हैं। कोई भी टेस्ट 14 से 18 हफ्ते के बीच किए जा सकते हैं, लेकिन एमआरआई प्रेगनेंसी के किसी भी समय हो सकता है।


...और डेढ़ साल पहले इंग्लैंड के कंब्रिया में जन्मा ऐसा बच्चा, अब सामान्य बच्चों की तरह जाता है स्कूल
सिर्फ 2 प्रतिशत दिमाग के साथ 8 जून 2017 को इंग्लैंड के कंब्रिया में जन्मे बच्चे के बचने की संभावना न के बराबर थी। डॉक्टर ने उसके जन्म लेने पर कहा था कि अगर वो बच भी जाता है तो उसको काफी शारीरिक विकार होंगे। जन्म के बाद उसकी गर्दन पर घाव को बंद किया गया और उसके दिमाग से द्रव बाहर निकालने की कोशिश की गई। सबको चौंकाते हुए उसके दिमाग ने बढऩा शुरू कर दिया। जब वो 3 साल का हुआ तो एक स्कैन में पता चला की उसका दिमाग 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है। अब यह बच्चा हमेशा हंसता रहता है और वो पढऩा, लिखना सीख रहा है वो स्कूल भी जाता है।


मई 2016 में जसवंतपुरा में एक माह में 11 ऐसे बच्चाें ने लिया जन्म, सभी का प्रसव कराने पर डॉ. भाटी का नाम लिम्का बुक में हुआ दर्ज वर्तमान में कालंद्री चिकित्सालय में कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भाटी ने वर्ष 2016 में जालोर के जसवंतपुरा अस्पताल में कार्यरत रहने के दौरान एक माह में ही ऐसे ग्यारह प्रसव करवाया था। इस पर उनका नाम लिम्का बुक में भी दर्ज हुआ था।


प्रसूताओं को रखना चाहिए खास ध्यान, ताकि स्वस्थ बच्चे का हो जन्म
प्रेगनेंसी से पहले और इसके दौरान विटामिन लेने से इस विकार से बचाव होता है। इस समय सही मात्रा में फॉलिक एसिड लेना भी जरूरी है। कुछ महिलाओं को खाने से ही पूरा फॉलिक एसिड नहीं मिलता है, उन्हें 400 माइक्रोग्राम फॉलिक एसिड के साथ मल्टीविटामिन सप्लीमेंट लेने चाहिए। फॉलिक एसिड के अन्य स्त्रोत हरे पत्तों को सब्जी, सुखी हुई बीन, संतरे, संतरे का जूस हैं। इसकेे अलावा आटा, चावल, ब्रेड, सेरियल और पास्ता में फॉलिक एसिड आरक्षित होता है। (जैसा कि कालंद्री अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एसएस भाटी ने बताया)


फॉलिक एसिड की कमी से 5000 हजार में से एक बच्चा होता है ऐसा अनेनसेफली जन्मजात विकारता है। इसमें भ्रूण का दिमाग, खोपड़ी और सिर, कोख में पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं। यह तब होता है जब तंत्रिका ट्यूब (गर्भाशय में एक ऐसी प्रणाली जो सामान्य रूप से रीढ़ की हड्डी और दिमाग के गठन को बंद कर देती है)।

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