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तापमान बढ़ने से नहीं बढ़ पाएगी फसलांे की लंबाई, किसान चिंतित

तापमान में दिनों दिन बढ़ोतरी होने से किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। इस वर्ष ठंड कम होने से किसानों को नुकसान का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:30 AM IST

तापमान में दिनों दिन बढ़ोतरी होने से किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। इस वर्ष ठंड कम होने से किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अगर इस तरह से तापमान में बढ़ोतरी होती रही तो फसल की लम्बाई नहीं बढ़ेगी और कम लम्बाई में ही पक जाएगी, जिससे वर्तमान में खेतों में खड़ी फसल गेहूं, जीरा ईशमगोल की फसलें प्रभावित होगी। किसानों ने बताया कि इस वर्ष एक माह पहले से ही तेज धूप पड़ने लग गई है, जिससे फसलों में वृद्धि नहीं होगी और फसलें बोनी रह जाएंगी। मिजाज हर रोज बदल रहा है। गत चार दिनों से मौसम में एकाएक उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 29 जनवरी को अधिकतम तापमान में अचानक बढ़ोतरी हुई और 30 डिग्री पारा पहुंच गया। वहीं 30 जनवरी को सर्द हवा चली और पारा 26 डिग्री पर आ गया। इसके बाद 31 जनवरी को बढ़ोतरी के साथ गर्मी का अहसास होने लगा और अधिकतम तापमान 32 डिग्री पहुंच गया। वहीं गुरुवार को फिर से 5 डिग्री की गिरावट के साथ पारा 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इस बीच न्यूनतम तापमान में चार दिन से लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जिससे रात की सर्दी का असर फीका पड़ता नजर आ रहा है।

जीरे के साथ दूसरे फसलों में रोग लगने की आशंका

वर्तमान समय में जिस प्रकार से धूप पड़ रही इससे जल्दी फसलें झुलस जाएंगी। इस वर्ष तेज धूप पड़ने से और तापमान में बढ़ोतरी से किसानो की फसलों में चने की फसल में लट का प्रकोप, फली छेदक रोग, सरसों में चेंपा और मोइल्या का रोग, गेहूं में दीमक का रोग, जीरा और की फसल में झुलसा रोग होने की संभावना है।

पीली पड़ी फसल, लंबाई आधी ही

इस दिनों तापमान में दिनोंदिन बढ़ोत्तरी होने से फसल सूखने लग गई है और पौधे पीले रंग के होने लग गए हैं। जीरा और इसबगोल पौधे औसतन जितनी लम्बाई के होते हैं, उनसे आधे ही लम्बाई पर पहुंचे है, जिससे पैदावार कम होगी और भविष्य में जानवरों के लिए चारे की कमी भी आएगी। मौसम इसी तरह बदलता रहा फसल चौपट हो सकती है

भास्कर संवाददाता जैसलमेर

तापमान में दिनों दिन बढ़ोतरी होने से किसानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। इस वर्ष ठंड कम होने से किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अगर इस तरह से तापमान में बढ़ोतरी होती रही तो फसल की लम्बाई नहीं बढ़ेगी और कम लम्बाई में ही पक जाएगी, जिससे वर्तमान में खेतों में खड़ी फसल गेहूं, जीरा ईशमगोल की फसलें प्रभावित होगी। किसानों ने बताया कि इस वर्ष एक माह पहले से ही तेज धूप पड़ने लग गई है, जिससे फसलों में वृद्धि नहीं होगी और फसलें बोनी रह जाएंगी। मिजाज हर रोज बदल रहा है। गत चार दिनों से मौसम में एकाएक उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 29 जनवरी को अधिकतम तापमान में अचानक बढ़ोतरी हुई और 30 डिग्री पारा पहुंच गया। वहीं 30 जनवरी को सर्द हवा चली और पारा 26 डिग्री पर आ गया। इसके बाद 31 जनवरी को बढ़ोतरी के साथ गर्मी का अहसास होने लगा और अधिकतम तापमान 32 डिग्री पहुंच गया। वहीं गुरुवार को फिर से 5 डिग्री की गिरावट के साथ पारा 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इस बीच न्यूनतम तापमान में चार दिन से लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जिससे रात की सर्दी का असर फीका पड़ता नजर आ रहा है।

रोग से बचाव

तेज धूप से आने वाले रोग से अपनी फसलों को बचाने के लिए किसान क्यूनालफ़ॉस 20 ई.सी. 5 बीघा में 1 लीटर और दीमक से बचाने के लिए क्लोरोफोस 2 लीटर प्रति हेक्टेयर और फसलों में अन्य कीटनाशक सहित केरोसीन का भी छिडकाव कर सकते हैं।

भूजल दोहन बढ़ा

तेज धूप से फसलें लगातार सूख रही है, जिससे फसलों को सिंचाई करने के लिए पानी की आवश्यकता पड़ रही है। पूर्व में फसलों में जो सिंचाई 6 से 8 घंटे में होती थी, वो ही अब 8 से 10 घंटे में हो रही है। ऐसे में भूजल दोहन के साथ साथ किसानों को विद्युत के यूनिट का भी भार पड़ रहा है।

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